Paper leak : प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सार्वजनिक परीक्षा कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी गई।
प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ी और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी जैसे अपराधों पर कड़ा शिकंजा कसना है। सरकार का मानना है कि नए प्रावधानों से ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी और अभ्यर्थियों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा मजबूत होगा। संशोधन विधेयक अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाने की संभावना है, जिसमें परीक्षा संबंधी अपराधों के लिए और कठोर कानूनी प्रावधान शामिल किए गए हैं।
धांधली करने वालों के खिलाफ 10 साल तक की सजा का प्रावधान
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली करने वालों के खिलाफ 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि कड़े कानूनी प्रावधानों से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत होगा। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब देशभर में पेपर लीक के मामलों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और इस मुद्दे पर सरकार विपक्ष के निशाने पर है।
हाल के दिनों में सरकार ने संकेत दिए थे कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कानून को और मजबूत किया जाएगा। अब सभी की नजर अगले सप्ताह संसद में पेश होने वाले संशोधन विधेयक पर रहेगी, जिसमें नए प्रावधानों का विस्तृत स्वरूप सामने आएगा।
प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक के दोषियों को अब 10 साल तक की कठोर कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट को तीन महीने के भीतर फैसला सुनाना होगा, ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके।










