भारत की रक्षा क्षमताओं में बड़ा इजाफा होने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त P-8I पोसाइडन समुद्री निगरानी विमानों की खरीद को भी हरी झंडी मिल गई है।
यह फैसला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। अब इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अंतिम स्वीकृति मिलना बाकी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से ठीक पहले लिया गया यह निर्णय दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा।
3.25 लाख करोड़ की ऐतिहासिक डील
करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की यह डील भारत के इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा खरीद मानी जा रही है। भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है। पुराने लड़ाकू विमानों के रिटायर होने के चलते नए और आधुनिक फाइटर जेट्स की तत्काल जरूरत थी।
नई डील के तहत:
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18 राफेल विमान सीधे फ्रांस से तैयार हालत (फ्लाई-अवे कंडीशन) में मिलेंगे।
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96 विमान भारत में ही निर्मित किए जाएंगे।
इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और रक्षा क्षेत्र में हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
राफेल: मल्टी-रोल और हाई-टेक क्षमता
राफेल एक अत्याधुनिक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री अभियानों में सक्षम है। यह लंबी दूरी की उड़ान, उच्च गति और आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है।
राफेल की प्रमुख विशेषताएं:
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स्कैल्प (SCALP) क्रूज मिसाइल – 250 किमी से अधिक दूरी तक सटीक प्रहार
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मेटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल – लंबी दूरी की मारक क्षमता
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हैमर प्रिसिजन गाइडेड हथियार
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स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम
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अत्याधुनिक रडार और एवियोनिक्स
भारतीय वायुसेना में पहले से 36 राफेल शामिल हैं, जो दो स्क्वाड्रनों में तैनात हैं। नए 114 विमानों के शामिल होने से स्क्वाड्रनों की संख्या बढ़कर लगभग 35-36 तक पहुंच सकती है।
नौसेना को भी मिलेगी मजबूती: 6 नए P-8I विमान
भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त P-8I पोसाइडन विमान भी मंजूर किए गए हैं। बोइंग द्वारा निर्मित ये विमान समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध और लंबी दूरी की टोही के लिए उपयोग किए जाते हैं।
भारत के पास पहले से 12 P-8I विमान मौजूद हैं। नए विमानों के जुड़ने से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमता और मजबूत होगी, खासकर चीन की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए।
गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट डील की पारदर्शिता
यह सौदा भारत और फ्रांस के बीच सरकार-से-सरकार (G2G) आधार पर किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और भरोसा सुनिश्चित होता है। इससे पहले 2016 में 36 राफेल विमानों की डील भी इसी मॉडल पर साइन हुई थी।
पिछले वर्ष भारत और फ्रांस के बीच डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के बीच हुए समझौतों से भारत में उत्पादन और डिलीवरी प्रक्रिया को गति मिलेगी।











