Sunday, March 15, 2026
Homeराष्ट्रीयइजराइल–ईरान युद्ध के बीच बीमा कवरेज पर बड़ा सवाल

इजराइल–ईरान युद्ध के बीच बीमा कवरेज पर बड़ा सवाल

इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इसका असर सिर्फ राजनीति या तेल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय यात्रियों, विदेश में काम कर रहे प्रोफेशनल्स और मिडिल ईस्ट से जुड़े व्यापारियों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यह है—क्या आपकी मौजूदा बीमा पॉलिसी युद्ध जैसी स्थिति में नुकसान की भरपाई करेगी?


सामान्य ट्रैवल और हेल्थ इंश्योरेंस क्या कवर करते हैं?

अधिकांश यात्रा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में “वॉर”, “सिविल अनरेस्ट” और “आतंकवाद” से जुड़े नुकसान को स्पष्ट रूप से एक्सक्लूजन क्लॉज में रखा जाता है।

इसका मतलब है:

  • यदि युद्ध के कारण फ्लाइट कैंसल होती है, तो क्लेम नहीं मिलेगा।

  • होटल खर्च बढ़ जाए, तब भी बीमा मदद नहीं करेगा।

  • युद्ध से जुड़ी चोट या स्वास्थ्य समस्या पर कवरेज नहीं मिलेगा।

हालांकि, यदि कोई सामान्य मेडिकल इमरजेंसी (जैसे हार्ट अटैक) हो और उसका युद्ध से सीधा संबंध न हो, तो कुछ कंपनियां शर्तों के अनुसार सहायता कर सकती हैं।


एक्सपर्ट की राय: पहले पढ़ें पॉलिसी की शर्तें

PlusCash के फाउंडर और CEO प्रणव कुमार के अनुसार, युद्ध या दंगे जैसी स्थिति में ज्यादातर ट्रैवल और हेल्थ पॉलिसियां क्लेम को कवर नहीं करतीं। भारत में बीमा नियामक Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) के नियमों के तहत भी यही प्रैक्टिस लागू है।

अगर आप मिडिल ईस्ट की यात्रा या वहां काम करने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी पॉलिसी का एक्सक्लूजन क्लॉज ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है। महंगा प्लान लेने का मतलब यह नहीं कि हर स्थिति कवर होगी।


व्यापारियों के लिए बढ़ी चिंता

मिडिल ईस्ट भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार है। तेल, गैस और अन्य सामान के आयात-निर्यात से जुड़ी कंपनियों पर युद्ध का सीधा असर पड़ता है।

खासकर Strait of Hormuz जैसे संवेदनशील शिपिंग रूट प्रभावित होने पर सामान्य मरीन इंश्योरेंस पर्याप्त नहीं रहता।


बिजनेस के लिए स्पेशल बीमा कवर

ऐसी परिस्थितियों में कंपनियों को विशेष बीमा उत्पादों की जरूरत पड़ती है, जैसे:

  • पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस

  • वॉर रिस्क इंश्योरेंस

  • मरीन वॉर रिस्क कवर

Vibhvangal Anukulakara Private Limited के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ मौर्य के अनुसार, राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के लिए ये कवर बेहद जरूरी हैं। ये पॉलिसियां निम्न जोखिमों से सुरक्षा देती हैं:

  • संपत्ति को नुकसान

  • बिजनेस इंटरप्शन (कारोबार ठप होना)

  • सरकार द्वारा जबरन अधिग्रहण

हालांकि, इनकी प्रीमियम लागत काफी अधिक होती है और हर कंपनी इन्हें आसानी से नहीं ले पाती।


इंटरनेशनल मार्केट में भी चुनौती

कुछ अंतरराष्ट्रीय बीमा समूहों ने पर्शियन गल्फ क्षेत्र में वॉर रिस्क कवर देना सीमित या बंद कर दिया है। इससे शिपिंग कंपनियों और निर्यातकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

हालांकि, कुछ बीमा कंपनियां “टेररिज्म राइडर” जैसे ऐड-ऑन देती हैं, लेकिन युद्ध के लिए विकल्प बेहद सीमित हैं।


लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस में क्या स्थिति?

घरेलू स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसियों में भी आमतौर पर युद्ध से जुड़ी घटनाएं एक्सक्लूडेड रहती हैं। इसलिए केवल प्रीमियम देखकर पॉलिसी खरीदना सही रणनीति नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलिसी लेते समय एक्सक्लूजन क्लॉज को ध्यान से पढ़ना उतना ही जरूरी है जितना कवरेज और प्रीमियम को समझना।


निष्कर्ष: सतर्क रहें, अपडेट रहें

इजराइल–ईरान संघर्ष जैसे हालात में बीमा कवरेज को लेकर भ्रम महंगा पड़ सकता है।

  • यात्री अपनी ट्रैवल पॉलिसी की शर्तें दोबारा जांचें।

  • मिडिल ईस्ट में काम करने वाले प्रोफेशनल्स कंपनी से अतिरिक्त कवरेज की जानकारी लें।

  • व्यापारिक कंपनियां विशेष वॉर और पॉलिटिकल रिस्क कवर पर विचार करें।

संकट के समय सही जानकारी और अपडेटेड बीमा पॉलिसी ही असली सुरक्षा कवच बन सकती है।

Related Articles

Latest News