जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत मामले में जिस इंजेक्शन का इस्तेमाल हुआ था, उसकी नीडल को एफएसएल (Forensic Science Laboratory) जांच के लिए भेजा गया है। एफएसएल रिपोर्ट आने में करीब 5 से 7 दिन का समय लग सकता है। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ाने के लिए इस रिपोर्ट का होना बेहद जरूरी है।
पिता वीरमनाथ पर गहराया शक
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और बयानों के आधार पर संदेह की दिशा अब साध्वी के पिता और गुरु वीरमनाथ की ओर बढ़ती नजर आ रही है। एसआईटी (SIT) प्रमुख छवि शर्मा ने हालांकि कहा कि अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं।
जांच में आश्रम के लोगों, परिजनों, शिष्यों और घटनास्थल पर मौजूद अन्य व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। इन बयानों को आपस में जोड़कर घटनाओं की कड़ियां धीरे-धीरे सामने आ रही हैं।
प्रेक्षा अस्पताल का बयान और इंजेक्शन विवाद
जोधपुर स्थित प्रेक्षा अस्पताल के डॉक्टर पीयूष जैन ने कंपाउंडर देवी सिंह के दावे को खारिज किया कि उन्होंने दो इंजेक्शन दिए थे। जैन ने कहा कि उन्होंने पिछले कई महीने से प्रेम बाईसा का उपचार नहीं किया।
डॉक्टर ने बताया कि जब प्रेम बाईसा 28 जनवरी की शाम अस्पताल लाया गया, तब वह कोलेप्स हो चुकी थीं। रिवाइव करने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। डॉक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रेम बाईसा को अस्थमा का कोई इलाज नहीं दिया गया।
वहीं, पिता वीरमनाथ का कहना है कि अस्पताल से ही प्रेम बाईसा का इलाज चलता था। उसी दिन इंजेक्शन लगाने के बाद उनकी तबियत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल लाया गया।
इंजेक्शन की टाइमिंग को लेकर बयान में अंतर
पिता वीरमनाथ ने कहा कि इंजेक्शन लगाने के 5 मिनट के भीतर प्रेम बाईसा अचेत हो गईं। इसके विपरीत, एफआईआर में उन्होंने कहा कि 9 मिनट बाद उनकी सेहत खराब हुई और मौत हो गई।
कंपाउंडर ने भी बयान में कहा कि आश्रम से निकलने के 20-25 मिनट बाद उन्हें फोन आया और बताया गया कि बाईसा की सेहत खराब है।
एसआईटी प्रमुख का बयान
एसआईटी प्रमुख छवि शर्मा ने कहा कि जांच अभी भी जारी है और कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। मेडिकल और तकनीकी जांच चल रही है।
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एफएसएल टीम को आश्रम दो बार ले जाया गया।
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आश्रम में सबूतों में छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं मिली।
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दाल सहित लिक्विड के सैंपल लिए गए हैं।
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प्रेम बाईसा से संबंधित चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिन्हें परिजनों की मौजूदगी में एफएसएल जांच के लिए भेजा जाएगा।
जांच में उठ रहे सवाल
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पिता और कंपाउंडर के बयानों में अंतर।
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इंजेक्शन की सटीक टाइमिंग और असर पर सवाल।
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मोबाइल फोन और अन्य सबूतों की एफएसएल जांच का इंतजार।
एसआईटी की बारीकी से चल रही जांच इस रहस्यमयी मौत की सच्चाई तक पहुँचने की दिशा में अहम साबित हो सकती है।











