नई दिल्ली: बजट सत्र के दौरान संसद में जारी गतिरोध के बीच लोकसभा में एक दुर्लभ और अप्रत्याशित स्थिति देखने को मिली। गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संयुक्त सत्र में दिए गए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही पारित कर दिया गया। यह 2004 के बाद पहली बार हुआ है, जब सदन ने स्थापित परंपरा से हटकर प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया के बिना प्रस्ताव को मंजूरी दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार, 4 फरवरी को धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देना था, लेकिन विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे और नारेबाजी के चलते लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। हालात बिगड़ने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
गुरुवार को कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को पढ़कर सुनाया, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस दौरान भी विपक्षी सांसदों ने विरोध और नारेबाजी जारी रखी।
2004 की याद दिलाता घटनाक्रम
संसद के हालिया इतिहास में यह घटनाक्रम जून 2004 की याद दिलाता है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी भारी हंगामे के कारण राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चल रही बहस में हिस्सा नहीं ले सके थे। उस समय भी उनकी अनुपस्थिति में ही धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया था।
विपक्ष का हंगामा, सरकार पर आरोप-प्रत्यारोप
गुरुवार सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही INDIA गठबंधन के सांसदों ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके चलते सदन को कुछ ही देर में स्थगित करना पड़ा। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया गया। राहुल गांधी 2020 के चीन गतिरोध के संदर्भ में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला देना चाहते थे।
निलंबन के बाद और गहराया टकराव
सरकार और विपक्ष के बीच टकराव उस समय और बढ़ गया, जब कांग्रेस के आठ सांसदों को अनुशासनहीन व्यवहार के आरोप में बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। इसके बाद से विपक्षी दल लगातार सदन में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे विधायी कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हो रही है।











