बड़ी जद्दोजहद के बाद शुरु हुई मूंग-उड़द की खरीद बीच में ही अटक गई है। किसानों के स्लॉट बुकिंग विगत पांच दिनों से नहीं हो रहे हैं। जबलपुर सहित महाकौशल का किसान परेशान है। अधिकारी कह रहे हैं कि सिस्टम मे खराबी आ गई है। भोपाल बात चल रही है। ऐसा पिछले 5 दिनों से बस यही जवाब- भोपाल बात हो रही है।
भारत कृषक समाज के अध्यक्ष केके अग्रवाल ने कहा कि सरकार मूंग-उड़द का उपार्जन पहले भी करना नहीं चाहती थी। किसानों के विरोध व दवाब के चलते सरकार को खरीद करनी पड़ रही है, लगता है सरकार केवल खरीद का ढोंग रच रही है, वास्तव में तो उसकी मंशा खरीद करने की है ही नहीं।
केके अग्रवाल ने कहा कि वैसे भी अधिकांश किसान तो मंडियो में व्यापारियों को अपना उत्पाद औने-पौने दामों पर बेच चुके हैं, अब थोड़े बहुत जो बचे हैं, चक्कर काटने मजबूर हैं। व्यापरियो की “पौ बारह” हो गई है, अब वे किसानों के नाम पर मोटा कमीशन देकर माल खपा कर भारी मुनाफा कमा रहे हैं। उनका व चहेतों का मिट्टी-कूड़ा सब तुल रहा है। आम किसान के लिए सौ अड़ंगे और नियम खड़े हैं। मूंग-उड़द खरीद भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। कोई सुनने वाला नहीं है। कोई सुने भी क्यों? नीचे से लेकर ऊपर तक सभी तो भागीदार हैं।
केके अग्रवाल ने शासन-प्रशासन से खरीद सिस्टम में तत्काल सुधार के साथ स्लॉट बुकिंग तथा खरीद अवधि में बढ़ोतरी की मांग की है। इस सम्बन्ध में प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव को मेल से पत्र प्रेषित किया गया है। कलेक्टर को भी वर्तमान स्थितियों की वास्तविकता से अवगत कराते हुए किसानों की मांग शासन तक पहुँचाने का आग्रह किया गया है।











