Friday, April 24, 2026
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जबलपुर रेलवे स्टेशन की सुरक्षा में सेंध, स्टेशन में पकड़ा गया फर्जी एएलपी, उपकरण भी मिले

जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार की देर शाम पकड़ा गया फर्जी असिस्टेंट लोको पायलट (एएलपी) मामले ने रेलवे की सुरक्षा मेें गंभीर संकट पैदा कर दिया है। पकड़े गये युवक के पास से रेलवे के फाग डिवाइस, वाकी टाकी व झंडिया भी मिली है।

प$कड़ा गया युवक आईआईटी का स्टूडेेंट है, वह अपने रिश्तेदारों, मित्रों, परिचितों को रेलवे में नौकरी लगने का रौब गांठने के लिए यह गोरखधंधा शुरू कर दिया.

हालांकि आरोपी देव शर्मा का कहना है कि उसे रेल इंजिन चलाने की चाह थी, इसलिए ऐसा किया। आरपीएफ ने उसे पकड़ाकर जीआरपी के हवाले कर दिया है.

पकड़े गए युवक का नाम देव शर्मा (20 वर्ष) है, जो वीर सावरकर वार्ड जबलपुर का निवासी है।

पूछताछ में उसने बताया कि उसे इंजन चलाना सीखने का शौक था, इसी वजह से उसने सहायक लोको पायलट बनकर स्टेशन आना शुरू किया। आरपीएफ ने आरोपी के खिलाफ रेल अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

फाग डिवाइस, वॉकी-टॉकी और झंडी बरामद

आरपीएफ को आरोपी की तलाशी लेने पर उसके पास से लोको पायलट को दिए जाने वाले फाग डिवाइस, ट्रेन संचालन में उपयोग होने वाला वॉकी-टॉकी, साथ ही लाल और हरी झंडी बरामद की है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी यह सभी उपकरण मुख्य स्टेशन स्थित लोको पायलट लॉबी से इश्यू करवाता था। रेल संचालन से जुड़े जो उपकरण आरोपी के पास से मिले है, वह रेलवे की सुरक्षा में गंभीर सेंध माना जा रहा है.

शंटर से विवाद, तकनीकी अज्ञानता से मामला सामने आया

इस मामले का खुलासा आरोपी देव शर्मा की हरकतों से हुआ है. मुख्य रेलवे स्टेशन पर लोको पायलट लॉबी के पास खड़ा था। उसने नीली पेंट और आसमानी रंग की शर्ट पहन रखी थी और हाथ में फाग डिवाइस व वॉकी-टॉकी था।

वह शंटिंग में लगे एक शंटर से बातचीत करने लगा। बातचीत के दौरान उसके हाव-भाव और तकनीकी जानकारी में कमी देखकर शंटर पायलट को शक हुआ।

कुछ विभागीय सवाल पूछे जाने पर युवक घबरा गया और सही जवाब नहीं दे सका। इसके बाद लॉबी कर्मचारियों को सूचना दी गई, जिस पर आरपीएफ मौके पर पहुंची और युवक को पकड़ लिया गया।

काफी समय सेॅ एएलपी बनकर घूमता था

आरपीएफ पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह कई दिनों से सहायक लोको पायलट की तरह ड्रेस पहनकर स्टेशन आता था।

उसे लॉबी से उपकरण इश्यू कराने की जानकारी रेलवे के एक लोको प्वाइंटमैन से मिली थी। वह सुबह लॉबी पहुंचकर उपकरण लेता और शाम को वापस जमा कर घर चला जाता था।

शुक्रवार को भी उसने दोपहर में उपकरण इश्यू कराए थे और रात को वापस जमा करने आया था, तभी उसकी सच्चाई सामने आ गई।

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