प्रेम का पहला सबक है
प्रेम को मांगो मत,
सिर्फ दो
एक दाता बनो
प्रेम का अपना
आंतरिक आनंद है
यह तब होता है
जब तुम प्रेम करते हो
परिणाम के लिए प्रतीक्षा
करने की कोई आवश्यकता नहीं है
बस प्रेम करना शुरू करो।
धीरे-धीरे तुम देखोगे
कि बहुत ज्यादा प्रेम
वापस तुम्हारे पास आ रहा है
व्यक्ति प्रेम करता है
और प्रेम करके ही जानता है कि
प्रेम क्या है
जैसा कि
तैराकी तैरने से ही आती है,
प्रेम, प्रेम के द्वारा ही
सीखा जाता है
प्रेम अधिक कठिन है
यह किसी और के साथ नाच है
दूसरे के लिए भी जानने की जरूरत है कि नृत्य क्या है
किसी के साथ तालमेल
बिठाना एक महान कला है
दो लोगों के बीच एक
सामंजस्य बनाना
दो लोगों का मतलब दो
अलग दुनियाएं
जब दो दुनियाएं करीब आती हैं,
संघर्ष अनिवार्य है
तुम नहीं जानते कि
कैसे सामंजस्य बनाना
प्रेम समस्वरितता है
और खुशी, स्वास्थ्य, समस्वरितता,
सब कुछ प्रेम से उपजता है
प्रेम करना सीखो
विवाह की जल्दी मत करो,
प्रेम करना सीखो
सबसे पहले एक महान
प्रेमी बन जाओ
प्रेम एक जुनून नहीं है,
प्रेम एक भावना नहीं है
प्रेम एक बहुत गहरी समझ है कि
कोई और किसी तरह तुम्हें पूरा करता है
कोई तुमको एक पूरा वर्तुल बनाता है
किसी अन्य की उपस्थिति
तुम्हारी उपस्थिति को बढ़ाती है
प्रेम तुम्हें स्वयं होने
की स्वतंत्रता देता है,
यह स्वामित्व नहीं है
प्रेम अनंतता है
यदि वह है, तो यह
बढ़ता चला जाता है,
बढ़ता चला जाता है
प्रेम शुरुआत जानता है,
लेकिन अंत नहीं जानता
राजन कुमार झा
पटना, बिहार
संपर्क- 9523393939
Email- myrajankumar@gmail.com














