जबलपुर | ऋतु रंगशाला आर्ट कल्चर एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय “ऋतु रंग नाट्य महोत्सव 2026” का संस्कृति मंत्रालय दिल्ली, संस्कृति संचनालय भोपाल एवं शहीद स्मारक ट्रस्ट समिति के सहयोग से आज अत्यंत भव्य और भावपूर्ण समापन हुआ।
उत्सव के अंतिम दिन रंगमंच पर कालजयी कृति “एक कंठ विषपायी” का मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को आत्मिक और वैचारिक विरेचन के एक नए धरातल पर खड़ा कर दिया।
शिव के विष और सती के प्रेम की महागाथा
श्री आनंद मिश्रा के कुशल निर्देशन में प्रस्तुत यह नाटक मात्र एक पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि जर्जर परंपराओं और नए मूल्यों के मध्य द्वंद्व का जीवंत दस्तावेज बनकर उभरा।
नाटक की कथावस्तु दक्ष द्वारा भगवान शिव के ऐतिहासिक अपमान और उसके प्रतिशोध में उपजी करुण गाथा पर केंद्रित रही।
नाटक में सती का शव उन मृत परंपराओं और रूढ़ियों का प्रतीक बनकर सामने आया, जो समय के साथ अपनी प्रासंगिकता खोकर दुर्गंधयुक्त हो जाती हैं।
मंच पर शिव का सती के पार्थिव देह को कंधे पर उठाए भ्रमण करना, उस सृजनात्मक युद्ध की अनिवार्यता को दर्शाता है जो नए जीवन-मूल्यों की स्थापना के लिए आवश्यक है।
दक्ष के यज्ञ-विध्वंस से लेकर सती के आत्मदाह और तदुपरांत इक्यावन शक्तिपीठों की स्थापना तक का घटनाक्रम मंच पर किसी महाकाव्य की भांति जीवंत हो उठा।
“जब शिव सती के प्रेम में व्याकुल होकर ब्रह्मांड की सुध भूल बैठे, तो प्रकृति की गति थम गई। यह मंचन प्रेम की पराकाष्ठा और शक्ति के प्राकट्य का अद्भुत संगम था।”
समारोह के समापन समारोह में गोटेगांव विधायक श्री महेंद्र नागेश जी एवं सांसद प्रतिनिधि पंकज चौथी जी की गरीबों में उपस्थिति रही
महोत्सव के समापन अवसर पर संस्था के निर्देशक प्रवीण नामदेव एवं सचिव ने संस्कारधानी के सुधी दर्शकों, कला-प्रेमियों, साहित्यकारों और प्रबुद्ध जनों के प्रति आत्मीय कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जबलपुर की जनता का कला के प्रति यह अनुराग ही संस्था की वास्तविक ऊर्जा है।
संस्था की ओर से आगामी वर्ष के लिए और भी अधिक भव्य आयोजन की घोषणा की गई, जिससे कला के प्रति संकल्पबद्धता को और बल मिला।











