उज्जैन: हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की शुरुआत के साथ ही नए वर्ष के धार्मिक पर्वों का भी आरंभ हो जाता है। इस पूरे महीने में सबसे प्रमुख और पवित्र पर्व Chaitra Navratri को माना जाता है।
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि का शुभारंभ होता है। इस दौरान घर-घर में Durga की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भक्त पूरे श्रद्धा भाव से माता की आराधना करते हैं।
9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त उपवास रखते हैं और माता को प्रसन्न करने के लिए फल, मिठाई और विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग अर्पित करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से की गई मां दुर्गा की आराधना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
अष्टमी और महानवमी का विशेष महत्व
नवरात्रि के दौरान अष्टमी और महानवमी तिथि को विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना जाता है। इन दिनों घरों में कन्या पूजन की परंपरा निभाई जाती है।
इस परंपरा में छोटी बालिकाओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उन्हें घर बुलाया जाता है और आदरपूर्वक भोजन व प्रसाद अर्पित किया जाता है।
19 मार्च से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य Anand Bhardwaj के अनुसार वैदिक पंचांग के मुताबिक इस वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 मार्च सुबह 06:52 बजे से होगी।
वहीं इस तिथि का समापन 20 मार्च सुबह 04:52 बजे पर होगा। इसलिए चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से माना जाएगा। नवरात्रि का समापन Rama Navami के दिन 27 मार्च को होगा।
घट स्थापना के शुभ मुहूर्त
इस वर्ष घट स्थापना (कलश स्थापना) के लिए दो शुभ मुहूर्त बताए गए हैं:
पहला शुभ मुहूर्त
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19 मार्च
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सुबह 06:52 बजे से 07:43 बजे तक
दूसरा शुभ मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त)
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दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
इन मुहूर्तों में कलश स्थापना करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
नवरात्रि में रखें इन बातों का ध्यान
नवरात्रि के दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाना शुभ माना जाता है।
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हल्का और सात्विक भोजन करें
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भोजन में जौ और जल का प्रयोग करें
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तेल, मसाले और अनाज का सेवन कम करें
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कलश स्थापना के समय जल में सिक्का डालें
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कलश पर नारियल स्थापित करें
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कलश के ऊपर मिट्टी में जौ बोएं
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कलश के पास अखंड दीपक अवश्य जलाएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार इन नियमों का पालन करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।











