हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार यूं तो वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं और हर एकादशी का अपना एक विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार भादो मास में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इसे जलझूलनी एकादशी या डोल ग्यारस आदि नामों से भी जाना जाता है।
इस वर्ष परिवर्तिनी एकादशी का व्रत बुधवार 3 सितंबर 2025 को रखा जाएगा। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु ने योग निद्रा के दौरान करवट बदला था, इसलिए ही इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन राजा बलि से भगवान श्रीहरि विष्णु ने वामन रूप में उनका सब कुछ दान में मांग लिया था और फिर उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीहरि विष्णु ने अपनी प्रतिमा सौंप दी थी। इस वजह से इसे वामन ग्यारस भी कहते हैं।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के वामन अवतार एवं माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा करने से सारे पापों से मुक्ति मिलती है।
परिवर्तिनी एकादशी तिथि 2025
हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की परिवर्तिनी एकादशी का प्रारम्भ बुधवार 3 सितम्बर को तड़के 3:53 (AM) बजे होगा और समापन गुरुवार 4 सितम्बर को भोर में 4:21 (AM) बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी का व्रत बुधवार 3 सितम्बर के दिन किया जाएगा। वहीं व्रत का पारण गुरुवार 4 सितंबर को दोपहर 1:36 (PM) बजे से अपरान्ह 4:07 (PM) बजे तक किया जा सकेगा।
पुराणों में भी परिवर्तिनी एकादशी के व्रत के महत्व के बारे में बताया गया है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है उसे सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के वामन अवतार एवं माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने वाले को वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। वहीं शास्त्रों के अनुसार इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन की कमी दूर होती है।
एकादशी पूजा विधि
एकादशी के दिन व्रती सुबह स्नानादि से निवृत होकर भगवान श्रीहरि विष्णु का ध्यान करें। इसके बाद व्रत करने का संकल्प लें। साथ ही भगवान श्रीहरि विष्णु से व्रत के सफलतापूर्वक पूरा होने की प्रार्थना करें। इसके बाद भगवान श्रीहरि विष्णु की प्रतिमा अथवा चित्र को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद रोली-अक्षत से तिलक करें और सफेद रंग फूल चढ़ाएं और फलों का भोग लगाएं। परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश का भी पूजन किया जाता है, अतः माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश का भी विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए। पूजन के पश्चात निराश्रितों और ब्राह्मणों को फलों का दान दें।
एकादशी का व्रत करने वाले लोगों को कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए, उन्हें व्रत के दिन दांत साफ करने के लिए टूथब्रश की जगह दातून का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा पान भूले से भी नहीं खाना चाहिए, क्योंकि पान खाने से रजोगुण की वृद्धि होती है और एकादशी त्याग को समर्पित दिन माना जाता है। व्रती को बेड पर नहीं सोना चाहिए। चावल खाने से भी परहेज करना चाहिए। साथ ही किसी के भी प्रति मन में ईर्ष्या-द्वेष नहीं आना चाहिए।











