जबलपुर। भक्त का भगवान पर पूर्ण विश्वास अति आवश्यक है क्योंकि विश्वास रूपी ईंट जितनी मजबूत होगी हमारे संबंधों की दीवार उतनी ही टिकाऊ बन पायेगी।
संबधों की मजबूती के लिए परस्पर विश्वास प्रथम आवश्यकता है। अविश्वास प्रेम को चोट पहुंचाता है, जिससे परस्पर संबंधों की मजबूत दीवारों में भी दरारें आ जाती हैं। विश्वास ही संबंधों को प्रेममय बनाने का आधार है।
जब प्रत्येक बात का मूल्यांकन स्वयं के नजरिए से किया जाता है तो वहाँ अविश्वास उत्पन्न होना स्वाभाविक है।
यह आवश्यक नहीं कि हर बार हमारे मूल्यांकन का दृष्टिकोण सही हो इसलिए संबंधों की मधुरता के लिए अपने दृष्टिकोण के साथ-साथ दूसरों की भावनाओं तक पहुँचने का गुण भी हमारे भीतर अवश्य होना चाहिए।
संबंध जोड़ना महत्वपूर्ण नहीं अपितु संबंध निभाना महत्वपूर्ण है। संबंधों का जुड़ना संयोग हो सकता है पर संबंधों को निभाना भी जीवन की एक साधना है।
संबंधों की इमारत का निर्माण “विश्वास रूपी ईंट” से किया जाना श्रेष्ठकर है।श्री राधे कृष्ण ने विश्वास से ही आदर्श स्थापित किया है। ईश्वर पर विश्वास करने से ही भक्त के सभी कष्टों और दुख दर्द दूर हो जाते हैं
उक्त उद्गार श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस श्रीराम मंदिर खैरी शहपुरा भिटौनी में पूज्य श्रीमद जगदगुरू नृसिंहपीठाधीश्वर डॉ स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने व्यास पीठ से कहे।
व्यास पीठ पूजन मुख्य यजमान सुभाष सिंह गौर व कृपाल सिंह गौर, राजेश सिंह गौर, कृष्णपाल सिंह गोर . जयपाल सिंह गौर, अनूपाल सिंह गौर, शैलेन्द्र सिंह गौर, रोहित सिंह गीर अजय सिंह गौर, डा. दीपक सिंह गौर, विक्रम सिंह गौर, आदित्य सिंह गौर अभिराज सिंह गौर, युवराज सिंह गौर अमित टेहगुनिया एवं आचार्य रामफल शास्त्री की उपस्थिति रही











