हिन्दू धर्म में भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार यूं तो वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं और हर एकादशी का अपना एक विशेष महत्व है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी की तिथि को कामिका एकादशी कहते हैं।
पौराणिक मान्यता है कि कामिका एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु के पूजन-अर्चन से भक्त के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उनकी सभी मनोकामना पूरी होती है। इस दिन पूजा के दौरान पीले वस्त्र, पीले कपड़ों से ढकी चौकी, पीले फूल और यथा संभव पीले रंग की ही पूजन सामग्री का उपयोग करने से भगवान विष्णु अति प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। कामिका एकादशी व्रत के दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है।
कामिका एकादशी तिथि एवं शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार इस बार सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ रविवार 20 जुलाई 2025 को दोपहर 12:12 (PM) बजे होगा और एकादशी तिथि का समापन सोमवार 21 जुलाई 2025 को सुबह 9:38 (AM) बजे होगा। ऐसे में उदयातिथि की मान्यतानुसार कामिका एकादशी का व्रत सोमवार 21 जुलाई को रखा जाएगा। इस बार सोमवार 21 जुलाई को कामिका एकादशी तिथि पर पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा, इस योग में पूजन करने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है। वहीं व्रत का पारण मंगलवार 22 जुलाई को सुबह 05:37 (AM) बजे से 7:05 (AM) बजे के मध्य किया जा सकेगा।
कामिका एकादशी पूजा विधि
एकादशी व्रत के दिन सुबह सूर्योदय के पूर्व स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अब घर के पूजा स्थल पर या पास के किसी मंदिर में जाकर व्रत का संकल्प लें और भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा के दौरान भगवान श्रीहरि विष्णु को पीले फल, पीले पुष्प, पंचामृत, तुलसी आदि समस्त पूजन सामग्री पूरे भक्ति भाव से अर्पित करें और भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी के मंत्रों का उच्चारण करें। एकादशी के दिन विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करने से विशेष लाभ होता है।
कामिका एकादशी व्रत कथा
महाभारत काल में एक बार कुंतीपुत्र अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा- हे प्रभु आप मुझे श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनाने की कृपा करें। इस एकादशी का नाम क्या है? इसकी विधि क्या है? इसमें किस देवता का पूजन होता है? इसका उपवास करने से मनुष्य को किस फल की प्राप्ति होती है?
तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा- हे पार्थ मैं श्रावण माह की पवित्र एकादशी की कथा सुनाता हूँ, ध्यानपूर्वक श्रवण करो। एक बार इस एकादशी की पावन कथा को भीष्म पितामह ने लोकहित के लिये नारदजी से कहा था।
एक समय नारदजी ने कहा- हे पितामह! आज मेरी श्रावण के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की इच्छा है, अतः आप इस एकादशी की व्रत कथा का विधान सहित वर्णन कीजिये। पितामह भीष्म ने कहा- हे नारदजी, अब आप बहुत ध्यानपूर्वक इसे श्रवण कीजिये- श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम कामिका है। इस एकादशी की कथा के श्रवण मात्र से ही वाजपेय यज्ञ के फल की प्राप्ति होती है। कामिका एकादशी के उपवास में शङ्ख, चक्र, गदाधारी भगवान विष्णु का पूजन होता है। जो मनुष्य इस एकादशी को धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उन्हें गंगा स्नान के फल से भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है।
भगवान श्रीहरि विष्णु की श्रावण माह में भक्तिपूर्वक पूजा करने का फल समुद्र तथा वन सहित पृथ्वी दान करने के फल से भी अधिक होता है। व्यतिपात में गण्डकी नदी में स्नान करने से जो फल प्राप्त होता है, वह फल भगवान की पूजा करने से मिल जाता है। संसार में भगवान की पूजा का फल सर्वाधिक है, अतः भक्तिपूर्वक भगवान की पूजा न बन सके तो श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का उपवास करना चाहिये। जो श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का उपवास करते हैं तथा भगवान श्रीहरि विष्णु का पूजन करते हैं, उनसे सभी देव, नाग, किन्नर, पितृ आदि की पूजा हो जाती है, इसीलिये पाप से भयभीत होने वाले व्यक्तियों को विधि-विधान सहित इस उपवास को करना चाहिये। कामिका एकादशी का व्रत करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, संसार में इससे अधिक पापों को नष्ट करने वाला कोई अन्य उपाय नहीं है।
हे नारदजी स्वयं भगवान ने अपने मुख से कहा है कि मनुष्यों को अध्यात्म विद्या से जो फल प्राप्त होता है, उससे अधिक फल कामिका एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है। इस उपवास के करने से मनुष्य को न यमराज के दर्शन होते हैं और न ही नरक के कष्ट भोगने पड़ते हैं। वह स्वर्ग का अधिकारी बन जाता है। जो मनुष्य इस दिन तुलसीदल से भक्तिपूर्वक भगवान विष्णु का पूजन करते हैं, वे इस संसार सागर में रहते हुये भी इस प्रकार पृथक रहते हैं, जिस प्रकार कमल पुष्प जल में रहता हुआ भी जल से पृथक रहता है।
तुलसीदल से भगवान श्रीहरि का पूजन करने का फल एक बार स्वर्ण तथा चार बार रजत दान के फल के समान है। भगवान विष्णु रत्न, मोती, मणि आदि आभूषणों की अपेक्षा तुलसीदल से अधिक प्रसन्न होते हैं। जो मनुष्य प्रभु का तुलसीदल से पूजन करते हैं, उनके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
इस कामिका एकादशी की रात्रि को जो मनुष्य जागरण करते हैं तथा भगवान के समक्ष जो मनुष्य घी या तिल के तेल का दीप प्रज्वलित करते हैं, उनको सूर्यलोक में सहस्रों दीपकों का प्रकाश मिलता है। कामिका एकादशी का व्रत प्रत्येक मनुष्य को करना चाहिये। इस व्रत के करने से ब्रह्महत्या आदि के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं तथा इहलोक में सुख भोगकर प्राणी अन्त में विष्णुलोक को जाते हैं। इस कामिका एकादशी के माहात्म्य के श्रवण व पठन से मनुष्य स्वर्गलोक को प्राप्त करते हैं।











