मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से दो दिवसीय संगीताचार्य पंडित सदाशिव भगवंत देशपांडे स्मृति समारोह का मंगलारंभ आज शाम संस्कृति थियेटर, भंवरताल गार्डन में हुआ।
कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने इस गायन, वादन एवं नृत्य का प्रतिष्ठापूर्ण शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर कलाकारों का स्वागत उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर एवं उप निदेशक शेखर करहाडकर ने पुष्पगुच्छ भेंट किया।
पंडित सदाशिव भगवंत देशपांडे ने संगीत के प्रचार-प्रसार एवं शिक्षा के लिए जीवन पर्यन्त कार्य किया। उनके प्रयासों से अनेक युवाओं को संगीत की शिक्षा प्राप्त हुई। ऐसे महान संगीताचार्य की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए संस्कृति विभाग द्वारा इस वर्ष से उनके नाम पर प्रतिवर्ष संगीत समारोह आयोजित किया जायेगा।
समारोह के प्रथम दिवस तीन सभाएं सजीं, जिसमें वादन, गायन एवं नृत्य की प्रस्तुतियां शामिल थीं। पहली सभा वादन की रही, जिसमें ताल तरंग समूह, भोपाल के द्वारा वाद्यवृंद की प्रस्तुति हुई। समूह में अंशुल प्रताप सिंह ने तबला, सत्येंद्र सिंह सोलंकी ने संतूर, सौनक बेनर्जी ने घटम, विमर्श मालवीय ने पखावज, हनीफ हुसैन सारंगी पर थे।
प्रस्तुति का आरंभ शिव तांडव परन से हुआ। कलाकारों द्वारा अपने-अपने वाद्ययंत्रों के साथ परिचय वादन के द्वारा तबला, घटम, पखावज सबाल जबाव, तबला वादन, शिव परन, हिरनी परन बादल गर्जना, बारिश एवं अनेक घरानेदार बंदिशों का वादन अंशुल प्रताप सिंह द्वारा किया गया।
संतूर पर मध्य लय, द्रुत लय में विभिन्न लयकारियों के साथ सत्येन्द्र सिंह द्वारा किया गया। सभी वाद्ययंत्रों का समागम विभिन्न लयकारियों एवं ताल स्वर का अद्भुत संगम सुनने का अवसर श्रोताओं को मिला। प्रस्तुति के अंत में सभी कलाकारों द्वारा अपने-अपने वाद्ययंत्र के साथ जुगलबंदी ने समां बांध दिया।
कार्यक्रम की दूसरी सभा शास्त्रीय गायन के नाम रही। मंच पर नमूदार हुईं डॉ. पारुल दीक्षित, ग्वालियर, जिन्होंने अपने गुरु की परम्परानुसार सुमधुर गायिकी से संगीत का आनंद सभागार में बिखेर दिया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति के आरंभ के लिए राग जोग का चयन किया।
अत्यंत मधुर इस राग में विलंबित खयाल की बंदिश के बाद मध्यलय तीन ताल की बंदिश ‘’ना माने थी जिया’’ प्रस्तुत की। इसके बाद द्रुत एक ताल में पंडित बलवंत राय भट्ट की बंदिश ‘’आज रंग राग छाए’’ से अपनी गहन साधना का परिचय दिया। इसके बाद द्रुत तीन में तराना एवं अंत में चैती ‘’चैत मास बोल ले कोयलिया’’ की प्रस्तुति के साथ समापन किया। उनके साथ हारमोनियम पर रवीन्द्र किल्लेदार एवं तबला पर पांडुरंग तैलंग ने संगत दी।
कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति नृत्यनाटिका प्रियंका जोशी एवं साथी, भोपाल के कलाकारों द्वारा कथक समूह नृत्य की रही। उन्होंने “षड्ऋतु कृष्णम्” नृत्यनाटिका प्रस्तुत की, जिसकी नृत्य परिकल्पना प्रियंका जोशी द्वारा की गई, संगीत रचना सोपान अंबासेलकर द्वारा की गई है।
इस नृत्यनाटिका के माध्यम से सौंदर्यपूर्ण ढंग से दिखाया कि कृष्ण हर ऋतु में है, वे वसंत की मधुरता में प्रेम बनकर, ग्रीष्म की तपन में विरह बनकर, वर्षा की फुहारों में मिलन बनकर, शरद की शीतलता में रास बनकर, हेमंत की नरमी में स्नेह बनकर और शिशिर की निस्तब्धता में भक्ति बनकर प्रकट होते हैं।
वे हर रंग, हर अहसास में झलकते हैं, क्योंकि कृष्ण केवल एक नाम नहीं, बल्कि अनंत प्रेम की अनुभूति हैं। इस प्रस्तुति में अक्षिमा जोशी, अणिमा पांडे, अनुष्का चंदसौरिया, मनस्वी तोलानी, जागृति यादव, खुशी यादव, शिल्पी सेन एवं जाह्नवी चंद ने नृत्य किया।
In the memorial ceremony on 29th –
पंडित सदाशिव भगवंत देशपांडे स्मृति समारोह में 29 मार्च को शाम 7 बजे से चार प्रस्तुतियां होंगी। इनमें सजल सोनी एवं साथी, जबलपुर द्वारा सितार-सरोद जुगलबंदी होगी।
दूसरी सभा में पंडित सुखदेव चतुर्वेदी, मुम्बई का ध्रुपद गायन होगा। तीसरी सभा में अद्रिजा बसु, कोलकाता का गायन एवं अंतिम सभा में नीलांगी कलंत्रे एवं साथी, जबलपुर का कथक समूह नृत्य प्रस्तुति होगी।











