Saturday, December 6, 2025
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Nag Panchami 2025: शिव योग और सिद्धि योग में मनाई जाएगी नाग पंचमी, जाने पूजा का शुभ मुहूर्त

सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। सामान्यतः नाग पंचमी का पर्व हरियाली तीज के दो दिन पश्चात् आता है। इस दिन नाग देवों के साथ भगवान शिव की पूजा और रूद्राभिषेक करना शुभ माना गया है। नाग देवों की पूजा करने से कालसर्प दोष दूर होता है।

पौराणिक मान्यता है कि नागों की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। नाग देवों की विधिपूर्वक पूजा करने से सुख, समृद्धि में वृद्धि होती है और भय से मुक्ति मिलती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग का अहंकार तोड़ा था। नाग पंचमी पर नाग देवों को दूध से स्नान करने की परंपरा है। ऐसा करने से कालसर्प दोष का भी प्रभाव कम होता है।

हिंदू धर्म के शास्त्रों और ग्रंथों में नाग देवों को पूजनीय माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार नाग पंचमी के दिन विशेष रूप से अनन्त, वासुकि, शेष, पद्म, कम्बल, कर्कोटक, अश्वतर, धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालिया, तक्षक और पिङ्गल आदि बारह नागों की पूजा की जाती है।

नाग पंचमी- पूजा मुहूर्त

इस बार नाग पंचमी मंगलवार 29 जुलाई 2025 को मनाई जाएगी। पंचमी तिथि का प्रारम्भ सोमवार 28 जुलाई 2025 को रात 11:24 बजे को होगा और पंचमी तिथि का समापन मंगलवार 29 जुलाई 2025 को रात 12:46 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार नाग पंचमी 29 जुलाई को मनाई जाएगी। नाग पंचमी के दिन मंगलवार 29 जुलाई को पूजा का मुहूर्त सुबह 5:41 बजे से सुबह 8:23 बजे तक रहेगा, इस दौरान पूजा के लिए 2 घंटे 43 मिनट की अवधि मिलेगी।

नाग पंचमी- शुभ योग

इस बार नाग पंचमी के दिन शिव योग, और सिद्धि योग बन रहा है। इस दिन तड़के 3:05 बजे से शिव योग बन रहा है, इसके अलावा नाग पंचमी पर पूरा दिन सिद्धि योग भी रहेगा। शिव योग और सिद्धि योग में भगवान शिव और नागों का पूजन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

नाग पंचमी- पूजा मंत्र

सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।
ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥
अर्थात- इस संसार में, आकाश में, स्वर्ग में, झीलों में, कुएँ में, तालाब में तथा सूर्य-किरणों में निवास करने वाले नाग देव हम आपको बारम्बार नमन करते हैं आप हमें आशीर्वाद दें।

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥
अर्थात- नौ नाग देवताओं के नाम अनन्त, वासुकी, शेष, पद्मनाभ, कम्बल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक तथा कालिया हैं। यदि प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल नियमित रूप से इनके नाम का जप किया जाये, तो नाग देव सदा सर्वत्र विजयी बनायेंगे।

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