धार्मिक नगरी उज्जैन में महाशिवरात्रि से पहले शिव नवरात्रि की तैयारियां जोरों पर हैं। हिंदू धर्म में नवरात्रि आमतौर पर चार बार मनाई जाती है, लेकिन उज्जैन में इसे पांच बार मनाने की परंपरा है।
इस साल शिव नवरात्रि 6 फरवरी से 15 फरवरी तक चलेगी। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि पहले दिन पंचमी के दिन भस्म आरती के दौरान पंचाभिषेक होगा। इसके बाद कोटेश्वर महादेव, भगवान वीरभद्र और रामेश्वर भगवान का पूजन शासकीय पुजारी घनश्याम करेंगे। दोपहर में महाकाल को नए वस्त्र और आभूषण पहनाए जाएंगे, और बड़ी संख्या में भक्तगण दर्शन हेतु पहुंचेंगे।
महाकाल के 10 अलग-अलग रूप
शिव नवरात्रि के दौरान भगवान महाकाल भक्तों को 10 अलग-अलग रूपों में दर्शन देंगे:
| दिनांक | रूप |
|---|---|
| 06 फरवरी | भाँग व दिव्य चंदन शृंगार |
| 07 फरवरी | नवीन शृंगार |
| 08 फरवरी | शेषनाग शृंगार |
| 09 फरवरी | घटाटोप शृंगार |
| 10 फरवरी | छबीना शृंगार |
| 11 फरवरी | होलकर शृंगार |
| 12 फरवरी | मनमहेश शृंगार |
| 13 फरवरी | उमा महेश शृंगार |
| 14 फरवरी | शिवतांडव शृंगार |
| 15 फरवरी | सप्तधान्य शृंगार |
भक्त इन अलग-अलग रूपों के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभव का आनंद लेंगे और अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
भक्तों और मंदिर प्रशासन की तैयारी
मंदिर प्रशासन ने सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है। सुरक्षा, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। भक्तों से अपील की गई है कि दर्शन के दौरान अनुशासन बनाए रखें और कोविड-19 दिशा-निर्देशों का पालन करें।
उत्सव का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
उज्जैन में शिव नवरात्रि की परंपरा कई सदियों पुरानी है। यह पर्व न केवल भक्तों को भगवान महाकाल के दर्शन का अवसर देता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी शहर में उत्सव की हलचल बढ़ाता है।











