Sunday, July 26, 2026
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अर्चना पूरन सिंह और परमीत सेठी ने खोला खुशहाल शादी का राज

नई दिल्ली: अर्चना पूरन सिंह और परमीत सेठी की शादी को 34 साल हो चुके हैं। लंबे समय से साथ रह रहा यह कपल अब अपने यूट्यूब चैनल पर अपनी सफल शादीशुदा जिंदगी के अनकहे पहलुओं को साझा कर रहा है। हाल ही में उन्होंने एक ऐसे “सीक्रेट” का खुलासा किया, जो सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन उनके रिश्ते की मजबूती की बड़ी वजह है।


‘स्लीप डिवोर्स’ का सच

अर्चना ने बताया कि उनके बीच अब “स्लीप डिवोर्स” हो चुका है। हालांकि, इसका मतलब रिश्ते में दूरी नहीं है। दरअसल, वे दोनों एक ही बेडरूम में लेकिन अलग-अलग बेड पर सोते हैं।

इसकी वजह है परमीत के खर्राटे और अर्चना की बेहद हल्की नींद। अर्चना कहती हैं कि अगर उनकी नींद एक बार टूट जाए तो दोबारा सो पाना मुश्किल हो जाता है, जिससे उनकी शूटिंग और काम पर असर पड़ता है।

परमीत ने भी माना कि पिछले 5-7 सालों से उन्होंने खुद अलग बेड पर सोने का फैसला किया, ताकि अर्चना आराम से सो सकें। उनके मुताबिक, लंबे रिश्तों में फिल्मी रोमांस से ज्यादा एक-दूसरे की छोटी-छोटी जरूरतों को समझना जरूरी होता है।


“सच्चे प्यार में शोर नहीं होता”

अर्चना का मानना है कि असली प्यार दिखावे में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों में झलकता है। वे कहती हैं, “सच्चे प्यार में शोर-शराबा नहीं होता। यह उन छोटी चीजों में होता है, जहां आप सामने वाले की सुविधा को प्राथमिकता देते हैं।”

दोनों मानते हैं कि एक-दूसरे की आदतों और लाइफस्टाइल का सम्मान करना ही रिश्ते की असली नींव है। अर्चना रात में देर तक जागती हैं, जबकि परमीत सुबह जल्दी उठते हैं, लेकिन वे कभी एक-दूसरे की दिनचर्या में दखल नहीं देते।


एक-दूसरे का खास ख्याल

परमीत आज भी रोज सुबह उठकर अर्चना के लिए चाय बनाते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि अर्चना को सुबह जल्दी उठना पसंद नहीं। वहीं, अर्चना इस बात का ध्यान रखती हैं कि परमीत को उनकी पसंद का हल्का और कम मसालेदार खाना मिले। यह आपसी समझ और संतुलन ही उनके रिश्ते को सहज बनाए हुए है।


‘एडजस्टमेंट’ ही है असली मंत्र

विशेषज्ञ भी मानते हैं कि एक ही कमरे में अलग बेड पर सोना रिश्ते में दूरी का संकेत नहीं, बल्कि एक-दूसरे की भलाई के लिए लिया गया समझदारी भरा फैसला हो सकता है।

अर्चना और परमीत का रिश्ता इस बात का उदाहरण है कि अगर ईगो को किनारे रखकर पार्टनर की सहूलियत को समझा जाए, तो रिश्ता बोझ नहीं बल्कि सुकून बन जाता है।

आखिरकार, सच्चा प्यार फिल्मी दिखावे में नहीं, बल्कि उन खामोश पलों में छिपा होता है, जहां आप बिना कहे अपने साथी की खुशी के लिए खुद को थोड़ा बदल लेते हैं।

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