दुनिया के शेयर बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिसकी शुरुआत अमेरिका से हुई और असर एशियाई बाजारों तक पहुंच गया। 13 फरवरी 2026 को अमेरिकी बाजार लगातार तीसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि शुक्रवार सुबह एशियाई बाजार भी लाल निशान में खुले। इस गिरावट की मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी अनिश्चितता मानी जा रही है।
निवेशकों को डर है कि नई एआई तकनीकें पारंपरिक बिजनेस मॉडल को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा। खास तौर पर ट्रकिंग, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और सॉफ्टवेयर सेक्टर के शेयरों में ज्यादा गिरावट देखी गई।
अमेरिकी बाजारों में बड़ी गिरावट
गुरुवार को प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
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S&P 500 1.57 प्रतिशत गिरा।
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Nasdaq Composite 2.03 प्रतिशत लुढ़का।
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Dow Jones Industrial Average 1.34 प्रतिशत नीचे आया।
टेक सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव रहा।
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Cisco Systems के शेयर लगभग 12 प्रतिशत टूट गए, क्योंकि कंपनी ने चालू तिमाही के लिए कमजोर गाइडेंस दी।
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Apple Inc. के शेयर 5 प्रतिशत गिर गए, जो अप्रैल 2025 के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट बताई जा रही है।
कुल मिलाकर अमेरिकी बाजार से करीब एक ट्रिलियन डॉलर (लगभग 90 लाख करोड़ रुपये) की बाजार पूंजी साफ हो गई।
एशियाई बाजारों में भी असर
अमेरिका की गिरावट का असर एशिया में साफ दिखा।
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ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 1.02 प्रतिशत नीचे रहा।
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जापान का Nikkei 225 0.58 प्रतिशत गिरा, जबकि TOPIX भी कमजोर रहा।
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दक्षिण कोरिया का KOSPI मामूली मजबूती दिखा सका, लेकिन KOSDAQ 1.36 प्रतिशत नीचे रहा।
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हांगकांग का Hang Seng Index फ्यूचर्स में कमजोर नजर आया।
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ताइवान का बाजार लूनर न्यू ईयर की छुट्टी के कारण बंद रहा।
सभी प्रमुख एशियाई इंडेक्स साप्ताहिक नुकसान की ओर बढ़ते दिख रहे हैं।
किन सेक्टरों पर ज्यादा दबाव?
एआई के तेजी से बढ़ते उपयोग को लेकर निवेशकों में आशंका है कि फ्रेट नेटवर्क, सप्लाई चेन और ऑटोमेशन में सुधार से पारंपरिक सेवाओं की मांग घट सकती है।
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ट्रकिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई।
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कमर्शियल रियल एस्टेट और फाइनेंशियल सेक्टर पर दबाव बढ़ा, क्योंकि ब्रोकिंग और अन्य सेवाओं में ऑटोमेशन से मार्जिन कम होने का डर है।
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सॉफ्टवेयर सेक्टर भी प्रभावित हुआ, जहां कमजोर गाइडेंस ने निवेशकों का भरोसा कम किया।
आगे क्या?
सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इन्वेस्को के ग्लोबल मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट ब्रायन लेविट का कहना है कि बाजार अब चुनिंदा शेयरों में असली विजेताओं और कमजोर कंपनियों की पहचान कर रहा है। हालांकि इसे पूरी तरह एआई बबल कहना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि बड़े इंडेक्स अब भी मजबूत स्तर पर हैं।
निवेशकों की नजर अब अमेरिका के जनवरी महीने के महंगाई आंकड़ों पर है। अनुमान है कि सालाना महंगाई दर 2.5 प्रतिशत और मासिक वृद्धि 0.3 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। अगर आंकड़े उम्मीद से ज्यादा खराब रहे तो बाजार में और घबराहट बढ़ सकती है।
फिलहाल एआई को लेकर अनिश्चितता, कमजोर कॉरपोरेट गाइडेंस और सेक्टर-विशिष्ट जोखिमों ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा हिलाया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बाजार स्थिरता पकड़ता है या गिरावट का दौर जारी रहता है।











