Thursday, April 30, 2026
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पुणे पोर्श-कांड में आरोपियों की जमानत से पीडि़त परिवार दुखी,मृतक अश्विनी के पिता ने जांच पर उठाए सवाल

जबलपुर। देश के बहुचर्चित पुणे पोर्श हिट एंड रन केस में सुप्रीम कोर्ट ने तीन आरोपियों को जमानत दे दी है। ऐसे में अब पीडि़त परिवार की चिंता बढ़ गई है।

हादसे में जान गंवाने वाली जबलपुर निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अश्विनी कोष्टा के पिता ने जमानत के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा कि इससे मामले की जांच प्रभावित हो सकती है।

पीडि़त परिवार ने आशंका जताई है कि जमानत पर रिहा हुए आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं और मामले के गवाहों को धमकाने की भी संभावना है। परिवार ने मांग की है कि जमानत पर छूटे आरोपियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएए ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

अश्विनी कोष्टा के पिता ने कहा किए इन लोगों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी। छूटने का बाद ये गवाहों को डराएंगे धमकाएंगे। सबूतों से छेड़छाड़ करेंगे। पैसों से लोगों को खरीदने की कोशिश करेंगे। मैं चाहता हूं कि ये केस एक नजीर बने। 15 साल के बच्चे नशा करते हैं।

अपराध करते हैं उनको वयस्क मानते हुए इनपर कार्रवाई करनी चाहिए। माफिया लोगों ने इसी नियम का फायदा उठाकर बच्चों से अपराध कराना शुरू कर दिया है। उन्होंने हादसे के समय पोर्श कार में पीछे बैठे दो अन्य आरोपियों पर मामला दर्ज न किए जाने पर भी ऐतराज जताया।

उनका कहना है कि हादसे के वक्त कार में मौजूद सभी लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सभी पर केस चलाया जाना चाहिए। सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने 3 फरवरी को इस मामले में आरोपी आदित्य अविनाश सूद, आशीष सतीश मित्तल व अमर संतोष गायकवाड को जमानत दी है।

इन तीनों पर जांच के दौरान खून के सैंपल से छेड़छाड़ करने के आरोप लगे थेए जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। यह हादसा 19 मई 2024 को पुणे में हुआ था।

शराब के नशे में एक नाबालिग युवक लग्जरी पोर्श कार चला रहा था। जिसने दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को कुचल दिया था। इस हादसे में जबलपुर की रहने वाली अश्विनी कोष्टा समेत दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश देखने को मिला था।

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