आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि आवारा कुत्तों द्वारा किसी नागरिक को काटने की घटना होती है, तो उन्हें नियमित रूप से भोजन कराने वाले फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।
साथ ही नगर निगमों को आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण सुनिश्चित करने तथा आक्रामक कुत्तों को आश्रय स्थलों में रखने के निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों के अनुपालन में राजनांदगांव नगर निगम द्वारा आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी और टीकाकरण का अभियान तेज कर दिया गया है। नगर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा ने बताया कि शहर में यह अभियान पिछले कई वर्षों से चलाया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि चालू वर्ष में अब तक लगभग 700 आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि आने वाले समय में करीब 1000 और कुत्तों की नसबंदी एवं टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आयुक्त ने यह भी बताया कि शहर के बाहरी क्षेत्रों में शेल्टर होम बनाए गए हैं, जहां आवारा और बीमार कुत्तों को सुरक्षित रखा जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, शहर के प्रत्येक वार्ड में निर्धारित फीडिंग प्वाइंट विकसित किए जा रहे हैं, ताकि लोग तय स्थानों पर ही कुत्तों को भोजन दें और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। बाइट — अतुल विश्वकर्मा, आयुक्त, नगर निगम राजनांदगांव उल्लेखनीय है कि शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या के कारण आम नागरिकों में भय का माहौल बना हुआ है।
बच्चों और बुजुर्गों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे लोगों में चिंता बढ़ी है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम द्वारा की जा रही इस कार्रवाई से लोगों को कितनी राहत मिलती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।











