Friday, September 11, 2026
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कोई खूबसूरत इत्तिफ़ाक़- रूची शाही

गुनहगार हूँ मैं मुझको बता कर चला जाता है
वो अपनी सारी खतायें मिटा कर चला जाता है
मैं हर रोज़ सोचती हूँ कि आज नही रोउंगी मैं
वो रोज़ आंखों में आँसू सजा कर चला जाता है

🔸 🔹 🔸

कोई खूबसूरत इत्तिफ़ाक़ हुआ होगा
रंग किसी और का उसपे चढ़ा होगा
अब उसको मेरी याद कभी नही आती
अब उसको कोई और मिल गया होगा

🔸 🔹 🔸

कभी रोये तो तुन्हें अपना शाना कौन देगा
बाद मेरे फिर हंसी मौसम सुहाना कौन देगा
और तुमको मेरे लिए अब वक्त ही नही है
हम जो न रहे तो तुमको ये ताना कौन देगा

-रूची शाही

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