Homeसाहित्यज़िन्दगी का किस्सा: रूची शाही

ज़िन्दगी का किस्सा: रूची शाही

दिल मे किसी और को लाकर देखा
तेरी तस्वीर को भी जला कर देखा
तेरी यादें किसी सूरत न गयी मुझसे
मैंने सब कुछ तो आजमा कर देखा

* * *

किसी के बिन नही रुकती है
ज़िन्दगी तो चलती रहती है
बस पूछना है तुमसे इतना
मेरी कमी तो नही खलती है

* * *

दर्द की हद से गुजरते रहे हम
चाह में तेरी यूं भटकते रहे हम
ज़िन्दगी का किस्सा रहा, बस इतना सा
रोज़ जीते रहे, रोज़ मरते रहे हम

रूची शाही

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