वंदना सहाय
सरदार भगत सिंह के थे अनमोल क्रांतिकारी विचार
भरी देशभक्ती जिसमें और जिससे मिलती प्रेरणा अपार
उनकी सोच कि विचारों को नहीं, इंसान को मारना होता आसान
नहीं मरते विचार किसी के, टूट जाते जब कि साम्राज्य महान
कहना उनका कि शादी की दुल्हन नहीं असली दुल्हन होगी
देश की आजादी ही उनकी असली दुल्हन होगी
उनके विचार कि अपनी जिंदगी अपने कंधों पर ढोते हैं
दूसरों के कंधे तो बस हमारे जनाजों को ही ढोते हैं
वे मानते कि नहीं क्रांति को हमेशा बम-पिस्तौल की चाह
और ना ही चाहे क्रांति हमेशा संघर्ष की ही राह
जोश दिलाया नयी पीढ़ी को, कि बेमतलब की जवानी है
जो जवां खून खौले नहीं, वह खून नहीं है पानी है
संदेश था कि क्रांति सिर्फ बम-पिस्तौल से नहीं आती
क्रांति की तलवार तो विचारों की सान पर तेज होती
जिसने कहा था कि गरीबी एक दंड है और पाप है
दुनियाभर में गरीबी ही सबसे बड़ा अभिशाप है
कह गए कि वतन पर मरने वाले नहीं मरेंगे कभी अकेले
हर बरस ही उनकी चिताओं पर जुड़ जाएँगे मेले
उन्हें धन नहीं, अपना अमन से भरा वतन चाहिए था
जीना था मातृभूमि के लिए, तिरंगे का कफ़न चाहिए था
वे जिये वतन के लिए ही और वतन के लिए ही मरे
मिट्टी में मिल कर भी, मिट्टी में वतन की खुशबु को भरे















