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सर्वांगीण और आत्मनिर्भर पेशेवर बनाना है मल्टी-डिसिप्लिनरी शिक्षा का उद्देश्य : कुलगुरु प्रो. वर्मा

जबलपुर। मल्टी-डिसिप्लिनरी शिक्षा छात्रों को एक साथ कई विषय पढऩे की लचीली सुविधा देती है, जिससे रचनात्मकता-आलोचनात्मक सोच और समस्या-समाधान कौशल का विकास होता है।

यह शिक्षा प्रणाली छात्रों को पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर जटिल वास्तविक दुनिया की समस्याओं को सुलझाने और बदलते रोजगार बाजार के अनुकूल बनने में सक्षम बनाती है। हमारी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी इसी उद्देश्य को लेकर कार्य कर रही है।

मल्टी-डिसिप्लिनरी शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं बल्कि युवा को एक सर्वांगीण और आत्मनिर्भर पेशेवर बनाना है। ये बात माननीय कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने विश्वविद्यालय पं. कुंजीलाल दुबे प्रेक्षागृह में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कही।

मध्यप्रदेश शासन तथा पीमए ऊषा परियोजना के सहयोग से क्रिस्प भोपाल के प्रबंधन में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के भौतिकी विज्ञान, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित आदि विभागों के संयुक्त तत्वावधान में ‘सतत् भविष्य के लिए विज्ञान: शुद्ध और अनुप्रयुक्त अनुसंधान के संगम पर नवाचार‘ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के अंतिम दिवस पं. कुंजीलाल दुबे प्रेक्षागृह में तकनीकी सत्रों का संचालन हुआ।

अंतरराष्ट्रीय विज्ञान कांफ्रेंस संयोजक प्रो. राकेष बाजपेयी ने बताया कि तकनीकी सत्रों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ एवं वैज्ञानिक ने विज्ञान के विभिन्न पहलुओं और तकनीकी अनुप्रयोगों पर अपने विचार रखे। समापन सत्र में मुख्य अतिथि श्रीलंका से आईं प्रो. चंद्रकांता एम. ने कांफ्रेंस के अनुभव साझा किये।

इसी तरह डॉ. ठाकुर, शोधार्थी रिया बेदी ने अपने अनुभव बताए। संचालन डॉ. रानू चतुर्वेदी एवं अभार प्रदर्शन डॉ. जेके मैत्रा ने किया।

कांफ्रेंस के सातवें सत्र की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आचार्य डॉ. एम. रामरख्यानी ने की। सत्र की शुरूआत डॉ. ओ.पी. ठाकुर, सॉलिड स्टेट फिजिक्स लैबोरेटरी, डीआरडीओ, दिल्ली के वैज्ञानिक ‘जी‘ डॉ. ओ.पी. ठाकुर ने “पावर डिवाइस के लिए वाइड बैंड गैप सेमीकंडक्टर के तौर पर सिलिकॉन कार्बाइड” टॉपिक पर चर्चा के साथ की।

उन्होने बताया कि शोधार्थी शोध संसाधनों का उपयोग कर सकते है, शैक्षणिक भ्रमण कर सकते है, उसके लिए प्रस्ताव भेजे जा सकते है। क्त्क्व् विभिन्न क्षेत्रों में काम करता है, विद्यार्थी अपनी इंटर्नशिप कर सकते हैं।

चेक गणराज्य से ऑनलाईन व्याख्यान-

तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान कांफ्रेंस के अंतिम दिवस आठवें सत्र में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय केंद्रीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के प्रो. दीना सुनील, डीआरडीओ दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. राम आशीष चौकसे एवं शासकीय जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रो. एस.एस. ठाकुर एवं रीजनल साइंस सेंटर, भोपाल, क्यूरेटर और प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर साकेत सिंह कौरव विषयांतर्गत उपयोगी जानकारी प्रदान की।

अंत में चेक गणराज्य के इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स ऑफ द चेक एकेडमी ऑफ साइंस, प्राग, चेक रिपब्लिक ने अपना व्याख्यान ऑनलाइन माध्यम से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर आयोजन समिति के प्रो. एस.एस. संधू, प्रो. पी.के. खरे, प्रो. जे.के. मैत्रा, प्रो. मृदुला दुबे, डॉ. राजेंद्र कुमार दुबे, डॉ. रिंकेश भट्ट, डॉ. पल्लवी शुक्ला, डॉ. रेणु पाठक, डॉ. दिव्या सिंह, डॉ. ज्योति चौबे, डॉ. रानू चतुर्वेदी, डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा, डॉ. दीपक कुमार रजक, डॉ. गरिमा प्रवीण पांडे, डॉ. मोहम्मद वाशिद खान, डॉ. धीरेंद्र मौर्य, डॉ. चंदन सिंह अहिरवार, डॉ. अभिषेक पांडे, राहुल नायक, इमरान मंसूरी, डॉ. प्रतिभा जयसिंह, डॉ. एम.एल. केवट आदि का सक्रिय सहयोग रहा।

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