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युग के परिवर्तन में- रामजी त्रिपाठी

अब भी युग के परिवर्तन में थोड़ी-सी देर है युग कभी बदलता नहीं, बदलती युग की परिभाषा, संघर्षों में सदा पनपती नव-युग की आशा, जन-मन के युग...

यह साक्ष्य नहीं संकेत- रामू सिंह

यह साक्ष्य नहीं संकेत प्रकृति का, समयासर निज अनुबंधन कर ले हे मानव मत खेल प्रकृति से, इन खेलों का प्रतिबन्धन कर ले है प्रमाण जब...

नन्हे राजकुमार- आलोक कौशिक

मेरे नन्हे से राजकुमार करता हूं मैं तुमसे प्यार जब भी देखूं मैं तुझको ऐसा लगता है मुझको था मैं अब तक बेचारा और क़िस्मत का मारा आने से तेरे...

अम्बर प्यार लुटाता है- कुमारी स्मृति कुमकुम

जब बून्द तरसती है धरती, अम्बर प्यार लुटाता है, अंधियारी काली रातों में, पवन वेग बढ़ जाता है, टूट टूट कर शाखों से जब, पत्ते भी...

मेरा ख़त छुपा कर- राम सेवक वर्मा

मेरा ख़त छुपा कर, क्यों तुमने मुझे सताया। तुम्हें प्यार हो गया तो, फिर क्यों न मुझे बताया पलकें झुकी तुम्हारी, बेबस सा हो गया मैं कलियों के बीच रहकर, भौंरे...

अनुबंध न टूटें रिश्तों के- स्नेहलता नीर

अनुबंध न टूटें रिश्तों के, आओ कुछ पल संवाद करें इस रंग बदलती दुनिया में, कुछ भूल चलें, कुछ याद करें छल-दंभ-स्वार्थ, विद्वेष-भाव, रिश्तों में कटुता...

प्रेम की दिवानी- राम सेवक वर्मा

क्यों जागती हो रात भर, मेरे प्रेम की दिवानी क्यों गूंजती है स्वप्न में, मेरे इश्क की कहानी मैं सोचता हूँ साथ में, उस रात तक जिऊंगा प्यार के सब...

अतीत के पन्नों से- डॉ उमेश कुमार राठी

जब भी आयी याद तुम्हारी हम तस्वीर निहार लिये सूनी सेज बिछी रहने दी एकल रैन गुज़ार लिये सुधियों की चौखट पर बाँधी हमने वंदनवार अभी खुशियों के इस वृंदावन...

सूरज सच का- रकमिश सुल्तानपुरी

सूरज सच का कब यार ढला? कब जीता जग में झूठ भला? ये द्वंद्व विषमता छोड़ सखे कर ले सच से गठजोड़ सखे सुख दुर्लभ है पर लुप्त...

अतीत के पन्नों से- डॉ उमेश कुमार राठी

जब भी आयी याद तुम्हारी हम तस्वीर निहार लिये सूनी सेज बिछी रहने दी एकल रैन गुज़ार लिये सुधियों की चौखट पर बाँधी हमने वंदनवार अभी खुशियों के इस वृंदावन...

मतवाला बसंत- स्नेहलता नीर

सब ऋतुओं से न्यारा-प्यारा, आया फिर मतवाला बसंत नव किसलय फूटे शाखों पर, सिमटा-सिमटा पतझर अनंत ले हाथ तूलिका धरती के, रँगता मनभावन अंग-अंग अनुपम शोभा मंडित सुरम्य, हतप्रभ विलोकता है...

हम त बड़े बीर हैं भारी- प्रशांत प्रसून

एक दिना हम जात रहे अपने घर से ससुरारी रस्ते में हमके भेटाइ गयीं दुइ दुइ दुइ ठे नारी हम तो बड़े बीर हैं भारी हम...

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