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बिजली संविदा कर्मियों का हो बगैर परीक्षा सीधे नियमितीकरण एवं बने गृह जिला ट्रांसफर नीति

यूनाइटेड फोरम के बैनर तले हजारों नियमित एवं संविदा अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने 

आज 13 जुलाई 2025 को अपनी मांगों के संबंध में सरकार का ध्यानाकर्षण कराया। यूनाइटेड फोरम वर्षों से विद्युत कर्मियों की जायज मांगों के संबंध में पत्राचार के माध्यम से कंपनी प्रबंधन प्रशासन एवं शासन को अवगत कराता आ रहा है किंतु पूर्णता जायज और नियमबद्ध मांगो को शासन प्रशासन नजरअंदाज कर रहा है।

यूनाइटेड फोरम से इंजी. व्हीकेएस परिहार ने बताया की वर्तमान में ऊर्जा मंत्री के प्रयासों से नवीन ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर जारी हुआ है जिसके लिए हम उनका अभिवादन करते हैं किंतु विद्युत विभाग में जो संविदा कर्मी लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार के माध्यम से पूर्ण प्रक्रियाओं का पालन करते हुए भर्ती हुए थे, जिन्हें कार्य करते हुए 8 से 10 वर्ष से अधिक समय का अनुभव है उन्हें अब रिक्त पदों के विरुद्ध सीधे नियमित किया जाना न्याय उचित होगा एक पद हेतु दो बार एग्जाम लेने की क्या आवश्यकता है जब आपके द्वारा ही एक बार संपूर्ण प्रक्रिया का पालन किया गया है तो अब ऐसे अनुभवी कोमियो को सीधे नियमित करना ही उचित होगा। 

यूनाइटेड फोरम के कार्य अध्यक्ष आरएस कुशवाह ने बताया की विद्युत विभाग में विभिन्न वर्गों में वेतन की विसंगतियां व्याप्त है ARO, कंपनी कैडर के नियमित कार्यालय सहायक एवं परीक्षण सहायक संविदा आदि की वेतन में वर्षों से विसंगति चली आ रही है जिसका निराकरण कंपनी स्तर पर किया जा सकता है किंतु छोटी-छोटी समस्याओं को समय रहते निराकरण न करने के कारण हमें मजबूर होकर धरातल पर उतरकर ध्यान आकर्षण जैसे कार्य कार्यक्रमों की आवश्यकता पड़ती है।

यूनाइटेड फोरम के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि फोरम निरंतर पत्रों के माध्यम से अपनी समस्याओं को शासन प्रशासन तक उठाता आया है किंतु जब तक विद्युत कर्मी सड़कों पर नहीं उतरता तब तक हमारी मांगों के प्रति विभाग उदासीन बना रहता है, विद्युत विभाग का काम राज्य सरकार के अन्य विभागो के समान नहीं है और ना ही सभी को एक ही तराजू में तौला जा सकता है विद्युत विभाग आंधी तूफान बारिश में भीषण गर्मी पर जब लोग चैन से घर में बैठते हैं उन विपरीत परिस्थितियों का सामना करके एक बिजली कर्मी खंबे पर अपनी जान का जोखिम लेकर काम करता है हमारे सैकड़ो विद्युत कर्मी कार्य करते हुए शहीद हो गए किंतु ना ही उन शहीदों की तरफ सरकार का ध्यान गया।

जहां एक और आंशिक वेतन के कारण वह अपने बुजुर्ग माता-पिता की आवश्यकता पूरी करने में समर्थ नहीं है तो वहीं दूसरी ओर सैकड़ो किलोमीटर दूर होने के कारण किसी भी विपरीत परिस्थिति में अपने माता-पिता तक समय रहते नहीं पहुंच पाते इसलिए शासन प्रशासन को चाहिए की विद्युत विभाग में एक ऐसी नीति का सृजन किया जाए जिससे सभी वर्गों के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के विद्युत कर्मचारी अपने गृह कंपनी ट्रांसफर होकर अपने घरों के आसपास विद्युत विभाग की सेवा एवं अपने परिवार का भरण पोषण कर पाए।

विद्युत कर्मियों की 9 सूत्रीय मांगे

  • संविदा कर्मचारियों को सीधे नियमित किया जाए।
  • बिजली कंपनियों में गृह जिला ट्रांसफर (कंपनी टू कंपनी) नीति बनाई जाए।
  • संविदा नीति 2023 में महंगाई भत्ता DA, इंक्रीमेंट जोड़ा जाए।
  • राजस्व सहायक अधिकारी एवं कार्यालय सहायक को उच्च शिक्षा प्राप्त समकक्ष पद पर तकनीकी पद दिया जाए, प्रथम हायर स्केल दिया जाए।
  • मध्य क्षेत्र में संविदा परीक्षण सहायक की वेतन विसंगति दूर की जाए।
  • संविदा नीति 2023 में पूर्व से निर्धारित 50% आरक्षण भर्तियों में दिया जाए।
  • राष्ट्रीय अवकाश एवं उत्सव अवकाश में संविदा कर्मियों को काम करने पर दोगुना मानदेय दिया जाए।
  • नियमित कर्मियों के समान नियम अनुसार 9,18,35 वर्ष पूर्ण करने पर उच्च वेतनमान एवं प्रमोशन दिया जाए।
  • शासकीय सेवा में संविदा से सीधी भर्ती होने पर 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि 70,80,90 नियमावली को समाप्त किया जाए।
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