ठेकेदारों से साठ-गांठ कर बिजली अधिकारी उन आउटसोर्स लाइन कर्मियों का शोषण कर रहे हैं, जो विद्युत वितरण कंपनी का ध्येय पूरा करने की लिए अपनी जान तक दे रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें मिल रहा है सिर्फ शोषण, अपमान और अवहेलना। बिजली कंपनी के ठेकेदार आउटसोर्स कर्मियों को न समय पर वेतन दे रहे हैं और न ही पूरा वेतन दे रहे हैं। ठेकेदारों की मनमानी बिजली अधिकरियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेंद्र श्रीवास्तव एवं संघ पदाधिकारियों ने आक्रोश जताते हुए बताया कि श्रम आयुक्त कोर्ट इंदौर के द्वारा पिछले तीन माह पूर्व आउटसोर्स कर्मियों को बढ़ा हुआ वेतन एवं एरियर देने के आदेश जारी किए गए थे।
श्रम आयुक्त कोर्ट के आदेश के बाद मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियों के प्रबंधन के द्वारा भी ठेकेदारों को आदेश कर बिजली कंपनियों में कार्यरत सभी आउटसोर्स कर्मियों को बढ़ा हुआ वेतन एवं एरियर का भुगतान तत्काल किया जावे।
हरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि श्रम आयुक्त कोर्ट और बिजली कंपनियों के प्रबंधन के आदेश बावजूद ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं, वे न कोर्ट के आदेश को मानते हैं और न ही उन्हें विद्युत कंपनी प्रबंधन का भय है। बिजली अधिकारियों से साँठ-गांठ कर आउटसोर्स कर्मियों का शोषण कर रहे हैं।
ये भी पढ़ें- बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बिजली कर्मियों को नहीं मिलेगा अवकाश, तत्काल करना होगा शिकायत का समाधान
हरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के जबलपुर, नरसिंहपुर, टीकमगढ़, कटनी, सागर, रीवा, शहडोल, मंडला, डिंडोरी आदि सर्किलों और जोनों में कुछ ठेकेदारों ने तो मानवीय दृष्टिकोण अपनाए हुते बढ़े वेतन और एरियर का भुगतान कर दिया है, लेकिन कुछ ठेकेदारों ने अभी तक बढ़े वेतन और एरियर का भुगतान नहीं किया है।
ये भी पढ़ें- एमपी ट्रांसको के सब-स्टेशन ठेके पर और गलत नीतियों के कारण नौकरी छोड़ रहे अधिकारी
संघ के अजय कश्यप, मोहन दुबे, राजकुमार सैनी, लखन सिंह राजपूत, विनोद दास, इंद्रपाल सिंह, पवन यादव, दशरथ पांडे, अशोक पटेल, अमीन अंसारी, शशि उपाध्याय, दशरथ शर्मा, किशोर बांदेकर, राजेश यादव आदि ने बिजली कंपनियों के प्रबंधन से मांग की है कि जो ठेकेदार आउटसोर्स कर्मियों को महीने के पहले सप्ताह की 7 तारीख तक समय से वेतन नहीं देता एवं एरिया का भुगतान नहीं करता है तो उस ठेकेदार को ब्लैकलिस्टेड करते हुए उसका ठेका निरस्त किया जाए।









