मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी प्रबंधन के द्वारा करोड़ों की लागत से निर्मित सब-स्टेशनों को ठेकेदार के हवाले किया जा रहा है और सही अनुपात में नई नियमित भर्तियाँ नहीं करने और कर्मचारी-अधिकारी विरोधी नीतियों के चलते नए अधिकारी नौकरी छोड़कर जा रहे हैं।
मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी प्रबंधन के द्वारा पिछले 10 वर्षों से 400 केवी सब-स्टेशनों, 200 केवी सब-स्टेशनों और 132 केवी सब-स्टेशनों को ठेकेदारों को सौंपा जा रहा है।
हरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि एमपी ट्रांसको प्रबंधन सब-स्टेशनों को ठेकेदारों को सौंपकर परीक्षण सहायकों का 200 किलोमीटर दूर स्थानांतरण कर रहा है। अनेक परीक्षण सहायक ऐसे भी हैं जिनको सेवानिवृत होने में सिर्फ 2 साल बचे हैं, लेकिन कंपनी प्रबंधन को इसकी परवाह नहीं है और वो लगातार कार्मिक विरोधी निर्णय ले रही है, यही कारण है कि नए अधिकारी भी दबाव सहन नहीं कर पा रहे हैं और कंपनी छोड़ कर जा रहे हैं।
हरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि 400 केवी सब-स्टेशनों, 200 केवी सब-स्टेशनों और 132 केवी सब-स्टेशनों से सेवानिवृत्त हो रहे परीक्षण सहायकों की जगह नई नियमित भर्ती करने की बजाए सभी सब-स्टेशनों को ठेकेदारों के हवाले किया जा रहा है और कंपनी प्रबंधन के द्वारा धीरे-धीरे पावर ट्रांसमिशन कंपनी निजीकरण की ओर ले जाया जा रहा है। निजीकरण की आशंका, मैनपावर की कमी और कार्य का अत्याधिक बोझ नए अधिकारी भी झेल नहीं पा रहे हैं और कंपनी छोड़ रहे हैं।
हरेंद्र श्रीवास्तव ने आरोप लगाते हुए कहा कि नई नियमित भर्ती नहीं कर ट्रांसमिशन कंपनी को कमजोर किया जा रहा है। कंपनी प्रबंधन के द्वारा अपने कर्तव्यों का ठीक से पालन नहीं किया गया, जिसकी वजह से ट्रांसमिशन कंपनी की दुर्दशा हो गई।
संघ के मोहन दुबे, राजकुमार सैनी, अजय कश्यप, लखन सिंह राजपूत, विनोद दास, शशि उपाध्याय, अमीन अंसारी, पीएम मिश्रा, राकेश नामदेव, इंद्रपाल सिंह, जगदीश मेहरा आदि ने ऊर्जा विभाग एवं ट्रांसमिशन कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि करोड़ों रुपयों के सब-स्टेशन ठेकेदारों के हवाले न करते हुए नियमित ऑपरेटर की भर्ती की जाए एवं जिन परीक्षण सहायकों को सेवानिवृत होने में सिर्फ 2 साल बचे हैं, उनका स्थानांतरण न किया जाए।









