बिजली कंपनियों में कार्यरत नियमित, संविदा एवं आउटसोर्स लाइनमैनों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए एक जैसा ड्रेस कोड लागू करना आवश्यक है। इसके लिए ल केवल ठेकदारों को निर्देशित किया जाये, अपितु सभी लाइनमैनों को वर्तमान महंगाई के अनुसार अच्छी क्वालिटी की दो यूनिफार्म के लिए समुचित राशि दी जाये।
मध्य प्रदेश विद्युत् मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि नियमित एवं संविदा कर्मचारियों के लिए खाकी यूनिफार्म निर्धारित की गई है, जबकि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कोई ड्रेस कोड नहीं है। हर ठेका कंपनी अपनी सुविधा से यूनिफार्म तय कर रही है, जिससे आउटसोर्स कर्मियों की पहचान सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।
साथ ही हरेंद्र श्रीवास्तव ने मांग की है कि विद्युत वितरण कंपनियां जिस तरह से नियमित कर्मचारियों को यूनिफॉर्म खरीदने के लिए 3595 रुपये की राशि देती हैं, उसी प्रकार संविदा कर्मचारियों को भी उक्त राशि बढ़ाकर 6345 रुपये दी जाए। साथ ही रेडीमेड यूनिफार्म के स्थान पर एक निश्चित राशि आउटसोर्स कर्मियों को दी जाए, ताकि वे अपने नाप की यूनिफार्म सिलवा सकें।
संघ के केएन लोखंडे, एसके मौर्य, राजकुमार सैनी, शशि उपाध्याय, मोहन दुबे, अजय कश्यप, लखन सिंह राजपूत, विनोद दास, दशरथ शर्मा, जगदीश मेहरा, इंद्रपाल सिंह, संदीप दीपंकर, गणेश केवट आदि आदि ने बिजली कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि सभी लाइनमैनों के लिए एक जैसा ड्रेस कोड लागू किया जाए।










