Sunday, March 15, 2026
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अधिवक्ता परिषद द्वारा शीघ्र एवं प्रभावी न्याय पर आयोजित “न्यायपथ” कार्यशाला संपन्न

जबलपुर। शीघ्र एवं प्रभावी न्याय का मार्ग प्रशस्त करने हेतु अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद द्वारा होटल आईटीसी वेलकम, तिलवारा रोड में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया ।

जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीपति जस्टिस श्री जेके माहेश्वरी एवं विशिष्ट अतिथि मध्य प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश श्री जस्टिस संजीव सचदेवा ने कार्यशाला को संबोधित कर मार्गदर्शन प्रदान किया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति जस्टिस श्री जेके महेश्वरी ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में मध्यस्थता का प्रमुख स्थान रहा है विवादों के त्वरित निराकरण का माध्यम मध्यस्थता से ही संभव है और मध्यस्थता का मूल तत्व ही संवाद है, संवाद को प्राथमिकता देकर मध्यस्थता के द्वारा प्रकरण का त्वरित निराकरण संभव है

हमारे देश में पूर्व में मध्यस्थता के माध्यम से ही त्वरित न्याय की व्यवस्था थी आज भी यही विधि प्रभावी है और यही कारण है कि मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम में विवादों के निराकरण हेतु विशेष प्रावधान किया गए है ।

जस्टिस श्री जेके माहेश्वरी ने कहा कि मध्यस्थता विवादों को सुलझाने की एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है, जिसमें एक निष्पक्ष तीसरा पक्ष (मध्यस्थ) दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए समझौता कराता है।

स्वैच्छिकता, भागीदारी, निष्पक्षता, गोपनीयता, आत्मनिर्णय, और खुली संचार व्यवस्था सुलह की मुख्य विषय वस्तु होती है, जहाँ अंतिम समझौता पक्षकारों पर निर्भर होता है जो पुनः उभयपक्ष में मधुर सम्बन्ध की आधारशिला रखता है मध्यस्थता की संरक्षक भारतीय न्याय व्यवस्था है यदि उभय पक्षों में मध्यस्थता के माध्यम से न्याय प्रदान किया जाता है तो न्यायिक व्यवस्था उक्त प्रक्रिया में संरक्षण प्रदान करते हुए त्वरित एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराती है ।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री संजीव कुमार सचदेवा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मध्यस्थता एवं सुलह ही न्याय प्रदान करने का परंपरागत माध्यम रहा है देश में पुरातन काल से दो पक्षों के मध्य विवादों का निपटारा मध्यस्थता के माध्यम से ही किया जाता रहा है, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक न्यायवाद का सशक्त माध्यम ही मध्यस्थता है। मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम में विवादों के निराकरण हेतु न्याय व्यवस्था द्वारा पर्याप्त कानून का विवरण दिया गया है, मध्यस्थ अधिनियम की धारा 11 में दिए गए विशिष्ट प्रावधान आपसी सहमति से मध्यस्थ चुनने का अधिकार देती है ताकि आप अपनी स्वेच्छा से सामंजस्य स्थापित कर न्याय से संतुष्ट हो सके ।

अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद जबलपुर उच्च न्यायालय इकाई द्वारा आयोजित कार्यशाला को माननीय न्यायाधिपति श्री विवेक रूसिया, श्री आनंद पाठक, एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधिपति श्री संजय एस अग्रवाल भारत सरकार के अतिरिक्त महान्यायवादी श्री सुनील जैन, अधिवक्ता परिषद के महासचिव श्री विक्रम दुबे ने भी संबोधित किया।

कार्यशाला में श्री प्रदीप सिंह सैंगर क्षेत्रीय संयोजक अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद, प्रांत महिला प्रमुख नीलम दत्त, मंचासीन थे।

इस अवसर पर श्री तेज़ कुमार मोड़ हरीश अग्निहोत्री,लाल ज्ञानेंद्र सिंह बघेल, सुयश मोहन गुरु, एस पी सिंह, देवेन्द्र सिंह बघेल, सुनील गुप्ता, संदीप शुक्ला, जितेन्द्र बेन, नितिन कुशवाहा, प्रियंका मिश्रा, प्रीति सिंह, संजय पटेल, सुधाकर मनी पटेल, अरुण मिश्रा, गजेंद्र सिंह ठाकुर, संजय मालवीय, अच्युतेंद्र सिंह बघेल, आरती द्विवेदी, प्रशंसा बेस, सीमा साहू, नूपुर सुलेरे, आदि उपस्थित थे।

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