ढाई हजार साल पहले भारत की भूमि ने विश्व को संदेश दिया- मानवता का कल्याण और सुख सदैव सुनिश्चित किया जाए: पीएम मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी20 शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि औपचारिक कार्यवाही शुरू करने से पहले, हम सभी की और से कुछ देर पहले मोरक्को में आये भूकंप से प्रभावित लोगों के प्रति मैं अपनी हार्दिक संवेदना प्रकट करना चाहता हूँ।

हम प्रार्थना करते हैं की सभी इन्जुरड लोग शीघ्र स्वस्थ हों. इस कठिन समय में पूरा विश्व समुदाय मोरक्को के साथ हैं और हम उन्हें हर संभव सहायता पहुंचाने के लिए तैयार हैं।


प्रधानमंत्री ने कहा कि G-20 के प्रेसिडेंट के तौर पर, भारत, आप सभी का हार्दिक स्वागत करता है। इस समय जिस स्थान पर हम एकत्रित हैं, यहाँ से कुछ ही किलोमीटर के फासले पर लगभग ढाई हजार साल पुराना एक स्तंभ लगा हुआ है।

इस स्तंभ पर प्राकृत भाषा में लिखा है-

“हेवम लोकसा हितमुखे ति,
अथ इयम नातिसु हेवम”

अर्थात,

मानवता का कल्याण और सुख सदैव सुनिश्चित किया जाए।


ढाई हजार साल पहले, भारत की भूमि ने, यह संदेश पूरे विश्व को दिया था।

आइए, इस सन्देश को याद कर, इस G-20 समिट का हम आरम्भ करें। इक्कीसवीं सदी का यह समय, पूरी दुनिया को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण समय है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये वो समय है, जब बरसों पुरानी चुनौतियां, हमसे नए समाधान मांग रही हैं और इसलिए, हमें Human Centric अप्रोच के साथ अपने हर दायित्व को निभाते हुए ही आगे बढ़ना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के बाद विश्व में एक बहुत बड़ा संकट विश्वास के अभाव का आया है। युद्ध ने, इस ट्रस्ट डेफिसिट को और गहरा किया है। जब हम कोविड को हरा सकते हैं, तो हम आपसी विश्वास पर आए इस संकट पर भी विजय प्राप्त कर सकते हैं।

आज G-20 के प्रेसिडेंट के तौर पर भारत पूरी दुनिया का आह्वान करता है, कि हम मिलकर सबसे पहले इस Global Trust Deficit को एक विश्वास, एक भरोसे में बदलें। यह हम सभी के साथ मिलकर चलने का समय है और इसलिए, “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” का मंत्र हम सभी के लिए एक पथ प्रदर्शक बन सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल हो, नॉर्थ और साउथ का डिवाइड हो, ईस्ट और वेस्ट की दूरी हो, Food, Fuel और Fertiliser का मैनेजमेंट हो, Terrorism और साइबर सिक्योरिटी हो, हेल्थ, एनर्जी और वॉटर सिक्योरिटी हो, वर्तमान के साथ ही, आने वाली पीढ़ियों के लिए, हमें इन चुनौतियों के ठोस समाधान की तरफ बढ़ना ही होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की G-20 प्रेसीडेंसी, देश के भीतर और देश के बाहर, Inclusion का, “सबका साथ” का प्रतीक बन गई है। भारत में ये People’s G-20 बन गया। करोड़ों भारतीय इससे जुड़े। देश के 60 से ज़्यादा शहरों में 200 से ज्यादा अधिक बैठकें हुईं। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि सबका साथ की भावना से ही भारत ने प्रस्ताव रखा था कि अफ्रीकन यूनियन को G-20 की स्थाई सदयस्ता दी जाए। मेरा विश्वास है कि इस प्रस्ताव पर हम सब की सहमति है। आप सबकी सहमति से, आगे की कार्यवाही शुरू करने से पहले, मैं अफ्रीकन यूनियन के अध्यक्ष को G-20 के स्थाई सदस्य के रूप में अपना स्थान ग्रहण करने के लिए आमंत्रित करता हूँ।