Friday, September 11, 2026
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कृषि क्षेत्र में तकनीक और नवाचार पर सरकार का जोर: शिवराज चौहान

नई दिल्ली,(हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि डिजिटल एग्रीकल्चर भारत की कृषि नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और मंत्रालय इस दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई–नाम, डिजिटल फसल आकलन और टेक्नोलॉजी आधारित सेवाओं के माध्यम से कृषि को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और किसान-केंद्रित बनाया जा रहा है।

कृषि भवन में आज प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय विकास साझेदारों के साथ उच्चस्तरीय बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में शिवराज सिंह ने बताया कि बजट पूर्व बैठकों के क्रम में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत की कृषि यात्रा खाद्य-अभाव से वैश्विक खाद्य आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनने तक पहुंची है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज देश कई प्रमुख कृषि उत्पादों का निर्यातक बन चुका है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद अब पोषण सुरक्षा और सतत आजीविका को अपनी प्राथमिकता बनाया है।

शिवराज चौहान ने “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार जल संरक्षण और जल के अधिकतम उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि माइक्रो-इरिगेशन, सिंचाई दक्षता बढ़ाने और जल-संरक्षण तकनीकों को अपनाने से किसानों की लागत घटेगी और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

उन्होंने बताया कि मंत्रालय पोषण आधारित खेती, मांग आधारित कृषि उत्पादन और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं और परियोजनाएं पहले से ही संचालित कर रहा है। इन पहलों से किसानों की आय बढ़ाने के साथ–साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।

चौहान ने कहा कि भारत कृषि क्षेत्र में अपने सफल अनुभवों और बेस्ट प्रैक्टिसेज को अन्य देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है, साथ ही वैश्विक नवाचारों से सीखकर उन्हें भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने पर जोर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद परस्पर लाभकारी सहयोग, ज्ञान-साझेदारी और दीर्घकालिक नीति निर्माण के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

बैठक में फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम, इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट , वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक , डॉइचे गेज़ेलशाफ्ट फ़्यूर इंटर्नैशियोनाले ज़ुसामेनआर्बाइट और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी के प्रतिनिधि सहित विभिन्न संस्थानों के पदाधिकारी शामिल हुए।

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