Sunday, July 26, 2026
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बिजली कंपनियों में 23 वर्षों से कार्यरत हजारों मीटर वाचकों के समक्ष नौकरी का संकट

मध्य प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों में वर्ष 2002 में घरों एवं प्रतिष्ठानों में स्थापित विद्युत मीटर की रीडिंग लेने के लिए हजारों मीटर वाचकों को भर्ती किया गया था। मप्रविमं तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार के द्वारा नियुक्त मीटर वाचक मीटर रीडिंग लेते थे, शाम को अधिकारियों को रिर्पोटिंग करते थे और फिर बिजली बिल का वितरण भी करते थे, इसके साथ ही राजस्व वसूली भी करते थे।

हरेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि धीरे-धीरे इसमें बदलाव आया और पुराने मीटर के स्थान पर नए इलेक्ट्रॉनिक मीटर लग गए, साथ ही उपभोक्ताओं की संख्या बढऩे से उसके बाद राजस्व वसूली भी 15 सौ करोड़ हो गई, जिसमें बड़ा योगदान इन मीटर वाचकों का भी है।

अब उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाये जा रहे हैं, जिससे मीटर वाचकों की उपयोगिता लगभग समाप्त हो गई है। 23 वर्षों से कार्यरत मीटर वाचकों के साथ अब अधिकारी तानाशाहपूर्ण व्यवहार कर रहे हैं और कोई न कोई आरोप लगाकर ब्लैक लिस्टेड करवा रहे हैं, हालांकि अधिकारियों पर ये भी आरोप है कि जो मीटर वाचक पिछले दरवाजे से लेनदेन करता है वह ब्लैकलिस्टेड होने से बच जाता है।

हरेन्द्र श्रीवास्तव का कहना है कि जिन मीटर वाचकों ने अपने जीवन का सुनहरा समय अपनी जवानी बिजली कंपनी के लिए खपा दी, उन्हें उम्र के इस पड़ाव में नौकरी से निकालना न केवल असंवेदनशीलता है, अपितु अमानवीयता भी है। मीटर वाचक 45 से 50 वर्ष की उम्र के करीब पहुंच गए हैं, उनके समक्ष परिवार के पालन पोषण का यक्ष प्रश्न खड़ा हो चुका है। इस उम्र में उन्हें अन्यत्र कहीं नई नौकरी भी नहीं मिल पाएगी।

संघ के अजय कश्यप, मोहन दुबे, राजकुमार सैनी, विनोद दास, लखन सिंह राजपूत, शशि उपाध्याय, दशरथ शर्मा, महेश पटेल, इंद्रपाल सिंह, संदीप दीपांकर, गणेश, किशोर, मुकेश पटेल, मदन पटेल, अमित मेहरा, जगदीश मेहरा आदि ने तीनों वितरण कंपनियों के प्रबंधन से मांग की है कि 23 वर्षों से लगातार मीटर रीडिंग कर कर रहे मीटर वाचकों पर झूठे आरोप लगाने वाले अधिकारियों पर अंकुश लगाया जाए और सभी मीटर वाचकों को संविदा नियुक्ति दी जाए और योग्यतानुसार कार्यालयों या मैदानी पदस्थापना देकर समायोजित किया जाये।

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