वह एक लोक गीत था
बेटी की विदाई का
जिसकी भाषा
हमारी भाषा से भिन्न थी
गीत के बोल
हमारी पकड़ से परे
फिर भी
सुनने वालों की आँखें नम थीं
भाषा कोई हो
बेटी की विदाई पर
वह भी
विदा होती हुई जान पड़ती है।
जसवीर त्यागी
नई दिल्ली
वह एक लोक गीत था
बेटी की विदाई का
जिसकी भाषा
हमारी भाषा से भिन्न थी
गीत के बोल
हमारी पकड़ से परे
फिर भी
सुनने वालों की आँखें नम थीं
भाषा कोई हो
बेटी की विदाई पर
वह भी
विदा होती हुई जान पड़ती है।
जसवीर त्यागी
नई दिल्ली