जबलपुर। सब सबको जाने – सब सबको माने के धेय्य को लेकर समरसता सेवा संगठन ने संत गाडगे जी की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रान्त सह प्रचार प्रमुख श्री शिवनारायण पटेल, शिक्षाविद साहित्यकार श्री आशुतोष तिवारी, पूर्व आयुक्त निशक्तजन श्री संदीप रजक, वरिष्ठ अधिवक्ता दयाराम रजक, समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष श्री संदीप जैन, सचिव श्री उज्जवल पचौरी की उपस्थिति में विचार गोष्ठी का आयोजन नर्मदा उद्यान, अग्रवाल धर्मशाला गौरीघाट में किया गया।
विचार गोष्ठी के उपरांत सभी ने मिलकर संत गाडगे जी महाराज की स्मृति में जामुन के पौधे का रोपण किया।
मुख्य वक्ता श्री शिवनारायण पटेल ने विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा हम आज गाडगे जी की जयंती पर एकत्र हुए है इस अवसर पर हम 1857 की क्रांति को याद करेंगे इसीलिए याद करेंगे क्योंकि हम देखेंगे कि उस दौर में ऐसे ऐसे महापुरुषों ने जन्म लिया जिन्होंने समाज को नई दिशा दी, ऐसे ही संत गाडगे जी महाराज थे जिनकी आज 150वीं जन्म जयंती है।
उन्होंने कहा हमारे ग्रंथो में गुण कर्म विभाग का वर्णन तो है पर जातियों का वर्णन कहीं नहीं है परन्तु कालांतर में समाज को तोड़ने का कार्य बाहरी ताकतों ने किया और आज भेदभाव और छुआछूत रूपी जहर समाज में घुल गया और इस तरह के अंधविश्वास, कुरीति कुप्रथा को दूर करने के लिए ही महापुरुषों का अवतरण होता है और उनके द्वारा दिए गए विचार और ज्ञान से ही हम समाज को एक सूत्र में पिरोके समरस समाज की स्थापना कर सकते है।
उन्होंने कहा संत गाडगे जी ने भी प्रभु का कीर्तन करते हुए स्वछता का संदेश दिया और सेवा मार्ग पर चलने की दिशा दिखाई।
वरिष्ठ समाजसेवी दयाराम रजक ने विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा भगवान श्रीराम के काल में कोई जातियाँ नहीं थी उस समय सिर्फ वर्णन व्यवस्था थी, जातियों में बाटने का कार्य छटवीं शताब्दी में मोहम्मद बिन क़ासिम ने किया और उसजे बाद कार्य के रूप में बनी हमारी वर्ण व्यवस्था में बदल गई. संत गाडगे जी जिनका 23 फरवरी 1876 में महाराष्ट्र के अमरावती में जन्म हुआ और उन्होंने समाज को दिशा दी।
अतिथि श्री आशुतोष तिवारी ने विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा जब प्रकृति ने हमारे बीच भेद नहीं किया तो फिर यह भेद आया कहाँ से और जहाँ से भी आया उसे दूर करने हमारे संतो, महापुरुषों का अवतरण हुआ और उन्होंने जन जन को चेताया और समाज में समरसता लाने का प्रयास किया और उसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए समरसता सेवा संगठन विगत 3 वर्षों से समाज को एक करने का कार्य कर रहा है।
उन्होंने बताया गाडगे जी महाराज जिन्होंने स्वयं विधिवत शिक्षा ग्रहण नहीं की उन्होंने अपने माता पिता से पारम्परिक शिक्षा ली पर उन्होंने हमेशा कहा कि शिक्षा से ही व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सकता है इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षित होना चाहिए। गाडगे जी 50 से अधिक संस्थाओ का निर्माण कर समाज सेवा की दिशा में कार्य करने की प्रेरणा दी।
पूर्व आयुक्त निशक्तजन श्री संदीप जैन ने विचार गोष्टी को सम्बोधित करते हुए कहा शिक्षा की महत्ता को संत गाडगे जी ने बताया और उन्होंने कहा था कि शिक्षा रूपी दूध पीने वाला शेर की तरह दहाड़ता है और शिक्षा के लिए उनके आह्वान का परिणाम हुआ कि समाज कि युवा पीढ़ी आज शिक्षित होकर देश और समाज की सेवा कर रही है।
उन्होंने कहा संत गाडगे जी ने समाज को संगठित रहने का संदेश दिया और उनके संदेश को आत्मसात करने कार्य हम करेंगे यहीं आह्वान है।
कार्यक्रम की प्रस्तावना सचिव उज्जवल पचौरी, संचालन श्री मनोज सेठ, आभार अध्यक्ष श्री संदीप जैन ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर केशलाल रजक, रमेश रजक, राजकुमार रजक, विवेक रजक, आरडी रजक, डॉ रमेश सोलकिया, ओंकार रजक, आलोक रजक, परमवीर सिंह, श्रीमती पूजा रजक, निशा बघेल, काजल रजक, मनोरमा रजक, प्रेमनारायण बाथरे, राज सिंह चंदेल, अजय रजक, रिंकू रजक, राहुल सोनी, मुकेश रजक, राजेंद्र रजक, महेंद्र रघुवंशी, संतोष झारिया, दीपक रजक, गोविन्द रजक, मनोहर लाल रजक, संजय रजक, गौरव रजक, बलदेव रजक, अर्जुन रजक, अनमोल रजक, सौरभ रजक, सुशील रजक, मुकेश कुमार, अनुज रजक आदि बड़ी संख्या में सामाजिक जन उपस्थित थे।











