Monday, March 16, 2026
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सावन शिवरात्रि 2025: भगवान शिव के पूजन एवं जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और व्रत की विधि

भगवान शिव को समर्पित सावन के पवित्र मास की शिवरात्रि को भी अत्यधिक शुभ माना गया है। मान्यता है कि शिवरात्रि के मौके पर शिव भगवान अपने भक्‍तों की पूजा और आराधना से बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं।  

हिन्दू पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि या मास शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है और शिवभक्त श्रद्धापूर्वक शिवलिंग की पूजा-अर्चना करते हैं। एक वर्ष में मुख्यतः बारह मासिक शिवरात्रि आती हैं।

श्रावण माह में आने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि या श्रावण शिवरात्रि कहते हैं। यूँ तो सावन का पूरा महीना ही भगवान शिव को समर्पित होता है एवं उनकी पूजा-उपासना से शुभ फल की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसलिए श्रावण मास की शिवरात्रि को अत्यधिक शुभ माना गया है।

सावन शिवरात्रि- शुभ मुहूर्त

इस बार श्रावण मास की सावन शिवरात्रि बुधवार 23 जुलाई 2025 को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि का प्रारम्भ बुधवार 23 जुलाई 2025 को प्रातः 4:39 (AM) बजे होगा और चतुर्दशी तिथि का समापन गुरुवार 24 जुलाई 2025 को तड़के 2:28 (AM) बजे होगा।

सावन शिवरात्रि के दिन निशिता काल की पूजा का समय गुरुवार 24 जुलाई को अर्द्ध रात्रि 12:07 (AM) बजे से 12:48 (AM) बजे तक रहेगा। इस दौरान भक्तों को पूजन के लिए 41 मिनट मिलेंगे। शिवरात्रि व्रत का पारण गुरुवार 24 जुलाई को (AM) बजे के बाद किया जा सकेगा।

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय- बुधवार 23 जुलाई को 7:17 (PM) बजे से 9:53 (PM) बजे तक

रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय- बुधवार 23 जुलाई को 9:53 (PM) बजे से गुरुवार 24 जुलाई को 12:28 (AM) बजे तक

रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय- गुरुवार 24 जुलाई को 12:28 (AM) बजे से 3:03 (AM) बजे तक

रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय- गुरुवार 24 जुलाई को 3:03 (AM) बजे से 5:38 (AM) बजे तक

सावन शिवरात्रि- जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

शिवरात्रि के दिन जलाभिषेक का पहला शुभ मुहूर्त 23 जुलाई को सुबह 4:15 बजे से लेकर सुबह 4:56 बजे तक रहेगा वही शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 8:32 बजे से लेकर सुबह 10:02 मिनट तक रहेगा। हिन्दू मान्यता के अनुसार सावन शिवरात्रि पर निशिता मुहूर्त में जलाभिषेक करना सबसे उत्तम माना गया है। ऐसे में निशिता काल में जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी होता है। निशिता काल की पूजा का समय गुरुवार 24 जुलाई को 12:07 (AM) बजे से 12:48 (AM) बजे तक रहेगा।

सावन शिवरात्रि- व्रत विधि

शिवरात्रि के एक दिन पहले त्रयोदशी तिथि के दिन भक्तों को केवल एक समय ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। शिवरात्रि के दिन, सुबह नित्य कर्म से निवृत्त होने के पश्चात्, पूरे दिन के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प के दौरान, भक्तों को मन ही मन अपनी प्रतिज्ञा दोहरानी चाहिए और भगवान शिव से व्रत को निर्विघ्न रूप से पूर्ण करने हेतु आशीर्वाद मांगना चाहिए। शिवरात्रि के दिन भक्तों को सन्ध्याकाल स्नान के पश्चात् ही पूजा करना चाहिए या मन्दिर जाना चाहिए। शिव भगवान की पूजा रात्रि के समय करना चाहिए एवं अगले दिन स्नानादि के पश्चात् अपना व्रत तोड़ना चाहिए। व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु, भक्तों को सूर्योदय व चतुर्दशी तिथि के अस्त होने के मध्य के समय में ही व्रत का समापन करना चाहिए।

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