Homeसाहित्यहमारी आँखों की- तृप्ति चौहान

हमारी आँखों की- तृप्ति चौहान

किसी ने
हमारी आँखों की खूबसूरती को
अपने लफ़्ज़ों में बयां किया था,
किंतु आज वो लफ़्ज़
जिंदगी की रफ्तार में
खो से गए हैं

आज आँखें भी खफ़ा है
उनकी बेरुखी से
इंतजार में है ये आँखें
उन लफ़्ज़ों की
जो इनकी खूबसूरती को
खत्म नहीं होने देती

-तृप्ति चौहान
रायपुर, छत्तीसगढ़

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