Friday, September 11, 2026
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CMHO की बढ़ीं मुश्किल, पहली पत्नी और दिव्यांग बेटी को कागजों से किया बेदखल

जबलपुर। एमपी के जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लोकायुक्त और विभागीय जांच के बाद अब उन पर राज्य मानवाधिकार आयोग का शिकंजा कस गया है।

डॉ. मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने पुत्र मोह और अपनी दूसरी पत्नी को लाभ पहुँचाने के लिए अपनी पहली पत्नी और 40 प्रतिशत दिव्यांग बेटी को सरकारी दस्तावेजों से बेदखल कर दिया है।

मामले का खुलासा तब हुआ जब समाजवादी पार्टी ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि डॉ. संजय मिश्रा ने अपने सेवा पुस्तिका और पेंशन प्रपत्रों में दर्ज अपनी कानूनी पत्नी तृप्ति मिश्रा और दिव्यांग पुत्री कुमारी जान्हवी मिश्रा का नाम अवैध रूप से हटा दिया।

उनकी जगह 22 वर्ष छोटी दूसरी पत्नी और उनके पुत्र का नाम दर्ज करा दिया गया, ताकि भविष्य में पेंशन और चल-अचल संपत्ति का लाभ उन्हें मिल सके।

दिव्यांग पुत्री के अधिकारों का हनन 

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि डॉ. मिश्रा ने अपनी पहली पत्नी और बेटी के हक की संपत्ति बेचकर दूसरी पत्नी के लिए आलीशान फ्लैट और अन्य सुख-सुविधाओं की व्यवस्था की। इस कदम से शारीरिक और मानसिक रूप से दिव्यांग जान्हवी मिश्रा का भविष्य अंधकारमय हो गया है। आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए प्रकरण क्रमांक 439-जबलपुर-2026 के तहत संज्ञान लिया है।

कमिश्नर हेल्थ को दिए निर्देश

मानवाधिकार आयोग की नोटशीट और रजिस्ट्रार (लॉ) के आदेश के अनुसार, अब इस पूरे मामले की जांच आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएं (भोपाल) को सौंप दी गई है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आवेदक की शिकायत पर न्यायोचित कार्रवाई कर उसका निराकरण किया जाए।

साथ ही, शिकायतकर्ता को यह स्वतंत्रता भी दी गई है कि वे इस मामले को सक्षम न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष भी ले जा सकते हैं। डॉ. संजय मिश्रा पहले से ही कई मोर्चों पर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर उनके विरुद्ध लोकायुक्त की जांच चल रही है और राज्य शासन के निर्देश पर अनुशासनात्मक कार्रवाई (विभागीय जांच) भी लंबित है।

अब अपनी ही दिव्यांग बेटी के अधिकारों के हनन के आरोपों ने उनकी प्रशासनिक और सामाजिक छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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