मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के जबलपुर सिटी सर्किल के अंतर्गत दक्षिण शहर संभाग के कार्यपालन अभियंता अभिषेक विश्वकर्मा से विगत दिवस मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेंद्र श्रीवास्तव के नेतृत्व में संघ प्रतिनिधिमंडल ने लाइन कर्मियों की लंबित मांगों को लेकर चर्चा की एवं ज्ञापन पत्र सौंपा।
इस दौरान कार्यपालन अभियंता ने बताया कि सभी नियमित, संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि सब-स्टेशनों में फर्नीचर, फास्टेड बॉक्स, रोशनी, डिस्चार्ज रॉड, अग्निशमन यंत्र आदि की व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि हमारे पास 9 परीक्षण सहायक हैं और सभी सब-स्टेशन में ड्यूटी करते हैं।
संघ के पूछने पर उन्होंने बताया कि हमारे संभाग में जो आउटसोर्स कर्मचारी कार्य करते हैं, उनमें जिन्होंने इलेक्ट्रीशियन ट्रेड से आईटीआई पास की है, सिर्फ उन्हीं को जोखिम भत्ता 1000 रुपये दिया जाता है। उन्होंने बताया कि नियमित, संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों को सातवें दिन अवकाश दिया जाता है। उन्होंने बताया कि नियमित, संविदा एवं आउटसोर्स कर्मियों को अवकाश के दिन बुलाने पर कंपनी के नियमों अनुसार एक्स्ट्रा वेजेस एवं नाइट अलाउंस दिया जाता है।
संघ के पूछने पर उन्होंने बताया कि सब-स्टेशनों में तीनों शिफ्ट 24 घंटे में केवल तीन ऑपरेटर अकेले ड्यूटी करते हैं। सहयोग के लिए एक हेल्पर दिया जाता है, उन्होंने भी माना कि ऑपरेटर के साथ एक हेल्पर का होना अतिआवश्यक है, ऐसा इसलिए है कि कोई विद्युत ऑपरेशन करते समय सुरक्षा उपकरणों को देना, साथ ही कोई भी आकस्मिक कार्य आ जाने पर हेल्पर का साथ में होना अतिआवश्यक है।
कार्यपालन अभियंता ने बताया कि हमारे पास नियमित कर्मचारियों की अत्यधिक कमी है। हमारे संभाग में उपभोक्ताओं की संख्या 1 लाख 9 हजार है। 30 फीडर है। 1400 ट्रांसफार्मर हैं। चार डीसी है। 20 सब-स्टेशन है। नियमित कर्मचारी 69 है। संविदा कर्मचारी 18 हैं। आउटसोर्स कर्मचारी 255 है।
चर्चा के दौरान संघ की ओर से मोहन दुबे, लखन सिंह राजपूत, दशरथ शर्मा, जगदीश मेहरा, जेपी त्रिपाठी, किशोर बांदेकर, प्रदीप पांडे आदि उपस्थित थे। संघ ने मांग की है कि जोखिमपूर्ण कार्य करने वाले सभी आउटसोर्स कर्मियों को 1000 रुपये जोखिम भत्ता दिया जाए।









