जबलपुर। एमपी के जबलपुर में दस हजार ऐसे वारंटी है जिन्हे पकडऩा पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। लम्बे समय से फरार वारंटी जिन्होने अपने नाम व पते बदल लिए है। कोर्ट से समंस, गिरफ्तारी व जमानती वारंट जारी होते हैं। पुलिस उन तक पहुंचने का प्रयास भी करती है, लेकिन पता ना मिल पाने के चलते पुलिस के हाथ खाली रहते हैं।
बताया गया है कि जिले के कई थानों में स्थायी वारंटियों की संख्या काफी अधिक है। गढ़ा थाने में सबसे ज्यादा 1075 वारंटी दर्ज हैं। इसके साथ ही गोहलपुर में 876, हनुमानताल में 825 व घमापुर थाने में 728 स्थायी वारंटी हैं। ये सभी फरार हैं। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक कई मामले ऐसे हैं, जिनमें आरोपी जमानत मिलने के बाद से ही फरार हैं।
हाल ही में पुलिस को पता चला कि जबलपुर के करौंदी निवासी संतोष अहिरवार ने वर्ष 2012 में मारपीट की घटना को अंजाम दिया थाए जो गायब है। इसके साथ ही राजगढ़ निवासी जाकिर खान ने 2013 में चोरी की वारदात को अंजाम देने का मामले पर गिरफ्तार किया थाए जिसे बाद में जमानत मिल गई।
इसी तरह कांचीपुरम निवासी स्टीव को भी मारपीट करने के मामले पर गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। तीनों ही आरोपी जमानत पर जेल से छूटकर बाहर आए और गायब हो गए। संतोष 14 साल और स्टीव एवं जाकिर करीब 13 साल से फरार है।
पता और नाम दोनों बदले-
कई मालमों में आरोपी जमानत मिलने के बाद मोहल्ला, शहर छोड़ देता है, इतना ही नहीं नाम तक बदल लेते है। और फिर दूसरे शहर या फिर राज्यों में छिपकर रहने लगते है। यहां तक अपनी पहचान तक छिपा लेते है। जिसके चलते पुलिस को उन्हें तलाश करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि फरार लोगों को जमानतदार पर पुलिस जरूर कार्रवाई करती है।
जमानत मिलते ही शहर छोड़ा-
जबलपुर के बाबा टोला निवासी राजेंद्र मराठा और उसका भाई नरबद मराठा ने साल 1997 में हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। दोनों को उम्रकैद की सजा हुई। कुछ साल बाद दोनों को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। इसके बाद दोनों ही भाई परिवार के साथ शहर छोड़कर गायब हो गए।
कई सालों बाद पुलिस ने दोनों को उत्तरप्रदेश के कानपुर से गिरफ्तार किया। जहां दोनों ही मजूदरी कर रहे थे। इस दौरान उनकी शक्ल तक बदल गई थी। दोनों ने रिश्तेदारों से भी बात करना बंद कर दिया था।











