जबलपुर। एमपी के साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के सोहागपुर एरिया में 11 अक्टूबर 2025 को काम करने के दौरान एक कर्मचारी ट्रिपर सहित पानी से भरी गहरी खदान में डूब गया। घटना के बाद आज तक कर्मचारी अनिल कुशवाहा का शव नहीं मिला। हालात ऐसे हो गए कि एनडीआरएफ के साथ-साथ सेना की टीम ने भी तलाश किया पर शव नहीं मिला। मृतक की पत्नी का आरोप है कि उनके पति आरकेटीसी प्राइवेट कंपनी में ठेके पर काम करते थे। जिस खदान में कंपनी के अधिकारियों ने अनिल कुशवाहा को काम पर लगा रखा था वह 15 सालों से बंद थीए इसके बाद भी काम करवाया जा रहा था।
मृतक की पत्नी आरती कुशवाहा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए पति के अंतिम संस्कार के लिए न सिर्फ शव की मांग की हैए साथ ही कहा है कि घटना में शामिल सुपरवाइजर अजय यादव और सुरक्षा अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शहडोल कलेक्टर सहित अन्य को नोटिस जारी करते हुए 4 सप्ताह में जवाब.तलब किया है। एसईसीएल की 15 साल पुरानी कोल माइंस बंद पड़ी थी।
कर्मचारी अनिल कुशवाहा की डयूटी लगाई थी। भारी बारिश के बाद भी जब कर्मचारी अनिल कुशवाहा ट्रिपर लेकर खदान पहुंचे तो वहां मिट्टी धंसक गईए जिसके चलते वह वाहन सहित गहरे पानी में समा गए। घटना के बाद पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में एनडीआरएफ ने चार दिनों तक तलाश किया। इतना ही नहीं सेना की टुकड़ी बुलाकर सर्चिंग किया गया लेकिन शव नहीं मिला। मृतक अनिल कुशवाहा जो रीवा के मऊगंज से थे, उनकी तलाश के लिए जिला प्रशासन ने वाराणसी से नेशनल डिजास्टर रिलीफ फोर्स (एनडीआरएफ) व जबलपुर से सेना की मदद मांगी।
एनडीआरएफ के 94 जवानों ने अपने प्रयास किए, लेकिन उन्हें केवल ट्रिपर खोज लिया। जो 84 फीट की गहराई में हैए जिसे निकाला नहीं जा सका। सेना ने भी वाहन और ऑपरेटर को पानी से बाहर निकालने के लिए मना कर दिया है। परिवार की सहमति से प्रशासन ने डेथ सर्टिफिकेट करते हुए 25 लाख रुपए की राशि को अंतिम रूप तय की है, जो एसईसीएल या आरकेटीसी द्वारा प्रदान की गई।
याचिकाकर्ता की पत्नी आरती कुशवाहा ने कोर्ट को बताया कि जिस कंपनी में उनके पति काम कर रहे थे। वह 15 साल से बंद हैए इसके बाद भी उन्हें ट्रिपर लेकर भेजा गया। अधिवक्ता मनोज कुशवाहा ने कोर्ट को बताया कि माइंस एक्ट के नियम है कि किसी खदान से अगर कोयला खनन कर लिया जाता है। तो फौरन क्लोजर प्लान बनाकर खदान बंद कर दी जाती है। एसईसीएल ने 15 साल से खदान को चालू रखा। हालात ऐसे हो गए कि खदान 90 फीट गहरी हो गई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनोज कुशवाहा ने कोर्ट को बताया कि 11 अक्टूबर की भारी बारिश हुई थी। इसके बाद फैक्ट्री प्रबंधन उन्हें खदान भेजा।
शाम 5 बजे अनिल कुशवाहा जब खदान पहुंचे तो मिट्टी से फिसलने के कारण वह ट्रिपर सहित गहरे पानी में डूब गए। कोर्ट को बताया गया कि सुरक्षा के कोई भी इंतजाम नहीं थे। आरोप है कि टारगेट पूरा करने के लिए कंपनी ने दबाव बनाकर काम करवाया, जिसके चलते यह हादसा हुआ। याचिका में बताया गया कि डायरेक्टर जनरल आफ माइंस की भूमिका महत्वपूर्ण है कि 15 सालों से आखिर वह खदान कैसे चल रही थी, जिसकी क्लोजर रिपोर्ट बन जाना था।
याचिका में मृतक की पत्नी आरती कुशवाहा ने कोर्ट से मांग की है कि कंपनी ने 60 दिन में बाडी देने की बाद की थी, पर आज तक शव नहीं मिला। कम से कम इतना कर दिया जाए कि डिकंपोज कंकाल को तलाश कर दिया जाना चाहिए। जिससे कि हिंदू धर्म के अनुसार अंतिम क्रिया कर्म करना है, लेकिन आज तक वह भी नहीं मिला है। जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट ने आरती कुशवाहा की याचिका पर सोमवार सुनवाई करते हुए भारत सरकार खनिज मंत्रालय के डीजीएमएस शहडोल कलेक्टर, एसईसीएल, आरकेटीसी एवं थाना धनपुरी को नोटिस जारी किया है।










