अगर दुनिया के सबसे ज्यादा धोखेबाज़ और मक्कार देशों की सूची बनाई जाए, तो उसमें पाकिस्तान का नाम सबसे ऊपर गिना जाएगा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर लगातार पाकिस्तान के हथियारों और फाइटर जेट्स की गुणवत्ता का ढोल पीटते रहे हैं। दावा किया जाता है कि पाकिस्तान के वेपन सिस्टम इतने आधुनिक हैं कि पूरी दुनिया उनकी कायल है।
पाकिस्तान खासकर चीन की मदद से विकसित किए गए JF-17 फाइटर जेट को लेकर जरूरत से ज्यादा उत्साहित नजर आता है। सऊदी अरब, अज़रबैजान और अन्य देशों को हथियार और गोला-बारूद बेचने के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं।
अज़रबैजान को मिला पुराना और कमजोर गोला-बारूद
हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स ने पाकिस्तान के इन दावों की पोल खोल दी है। जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान ने अपने मित्र देश अज़रबैजान को ऐसा गोला-बारूद सप्लाई किया है जो न सिर्फ आउटडेटेड है, बल्कि उसकी मारक क्षमता और रेंज भी घोषित मानकों से काफी कम पाई गई है।
रक्षा विशेषज्ञों और फील्ड रिपोर्ट्स के मुताबिक:
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कई छोटे हथियारों के कारतूसों में जंग, गलत माप और पाउडर की असमान मात्रा पाई गई
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आर्टिलरी के गोले तय रेंज का सिर्फ 40–60 प्रतिशत ही हासिल कर पा रहे हैं
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कमजोर क्वालिटी कंट्रोल और घटिया उत्पादन प्रक्रिया इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं
भारत बनाम पाकिस्तान: अर्मेनिया और अज़रबैजान का उदाहरण
जहां पाकिस्तान अज़रबैजान को घटिया गोला-बारूद बेचता पकड़ा गया, वहीं भारत ने अज़रबैजान के पड़ोसी अर्मेनिया को पिनाका मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम एक्सपोर्ट किया है।
यही पिनाका सिस्टम ऑपरेशन “सिंदूर” के दौरान अपनी सटीकता और मारक क्षमता साबित कर चुका है। यह अंतर भारत और पाकिस्तान के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड को साफ तौर पर दिखाता है।
सऊदी अरब का पाकिस्तान से भरोसा उठना
पाकिस्तान की घटिया सप्लाई का असर उसके पुराने ग्राहकों पर भी पड़ा है।
सऊदी अरब, जो कभी पाकिस्तानी छोटे हथियारों के कारतूस और आर्टिलरी गोले पर निर्भर था, अब धीरे-धीरे अपने सप्लायर्स बदल रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रियाद अब:
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भारत से 5.56 mm और 7.62 mm कारतूस
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155 mm आर्टिलरी गोले
खरीद रहा है, जो कठोर ट्रायल और वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में भरोसेमंद साबित हुए हैं।
यूक्रेन युद्ध में भी खुली थी पोल
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी गोला-बारूद पर सवाल उठे हों। ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआती चरण में यूक्रेन ने पाकिस्तान निर्मित 155 मिमी गोले खरीदे थे।
लेकिन:
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कई मामलों में समय से पहले विस्फोट
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M777 हॉवित्जर के बैरल फटने की घटनाएं
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सैनिकों की जान को सीधा खतरा
जैसी गंभीर शिकायतें सामने आई थीं।
ग्रैड रॉकेट सिस्टम की नकल भी फेल
पाकिस्तान द्वारा सप्लाई किए गए सोवियत-युग के ग्रैड मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के नकल वाले वेरिएंट को भी:
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अस्थिर फ्लाइट पाथ
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कमजोर प्रिसिजन
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कम विश्वसनीयता के लिए आलोचना झेलनी पड़ी।
वैश्विक हथियार बाजार में पाकिस्तान की साख पर संकट
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में विश्वसनीयता और सुरक्षा मानक, कीमत से कहीं ज्यादा अहम होते हैं। यदि पाकिस्तान ने:
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क्वालिटी कंट्रोल
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प्रोडक्शन प्रोसेस
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टेक्निकल टेस्टिंग
में बड़े सुधार नहीं किए, तो वह न केवल मौजूदा ग्राहक खो सकता है बल्कि नए बाजारों में प्रवेश भी मुश्किल हो जाएगा।
आगे क्या? अंतरराष्ट्रीय जांच की तैयारी
अज़रबैजान समेत अन्य देशों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे पाकिस्तानी गोला-बारूद पर अब गहन तकनीकी मूल्यांकन की मांग तेज हो रही है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय परीक्षण रिपोर्ट और फील्ड असेसमेंट इस पूरे मामले पर और स्पष्ट तस्वीर पेश कर सकते हैं। फिलहाल, पाकिस्तान के रक्षा निर्यात की साख गंभीर जांच के घेरे में है।











