हम त बड़े बीर हैं भारी- प्रशांत प्रसून

एक दिना हम जात रहे अपने घर से ससुरारी
रस्ते में हमके भेटाइ गयीं दुइ दुइ दुइ ठे नारी
हम तो बड़े बीर हैं भारी हम तो बड़े बीर हैं भारी

आव न देखा ताव न देखा झट से पल्लू खींचा
सरेआम उसने उतार कर हमको चप्पल पीटा
होइ गई हमरी खातिरदारी हम तो बड़े बीर हैं भारी

हमका पकड़ै खातिर आयीं सुन दरोगा भउजी
एहिं बवाल मे होइ गई बाटेै हमरे घर अलगौझी
हम न जाबै अब ससुरारी हम तो बड़े बीर हैं भारी

थाने पर से सुन बड़कऊ लौटी के घरवा आवा
देखतइ मलकिन हमसे पूछिन का भ सजन बतावा
खाये लात रहे सरकारी हम तो बड़े बीर हैं भारी

मेहरारू के आगे उगिल दिहा सगला सच्चाई
लड़की छेड़े के चक्कर म होइगै खूब पिटाई
अब त नाही खैर हमारी हम तो बड़े बीर हैं भारी

बेलना पीढ़ा लाठी डंडा ओसे कुछ न छूटा
भूभुन फूला बा एक बीता अइसन उसने कुटा
गलती होइगै हमसे भारी हम तो बड़े बीर हैं भारी

-प्रशांत प्रसून
करपिया, प्रयागराज
7619041493
pmishra48003@gmail.com