श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को श्रावणी तीज अथवा हरियाली तीज कहते हैं। सावन के महीने में चारों ओर हरियाली देख कर सबका मन झूम उठता है। हरियाली तीज मुख्यत: स्त्रियों का त्योहार है। जब सावन के महीने में चारों तरफ हरियाली की छटा को देखकर मन पुलकित होकर नाच उठता है। जगह-जगह झूले पड़ते हैं। स्त्रियां अपने हाथों पर मेहंदी रचाती हैं। हरियाली तीज के दिन अनेक स्थानों पर मेले लगते हैं और माता पार्वती की सवारी बड़े धूमधाम से निकाली जाती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। भगवान शिव ने उनके तप से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। मान्यता है कि श्रावण शुक्ल तृतीया के दिन माता पार्वती ने 100 वर्षों के तप उपरान्त भगवान शिव को पति रूप में पाया था। इसी मान्यता के अनुसार स्त्रियां माता पार्वती का पूजन करती हैं।
हरियाली तीज भगवान शिव एवं माता पार्वती को समर्पित है। इस दिन व्रत रखकर कुंवारी युवतियां और सुहागिन स्त्रियां माता पार्वती का पूजन करती हैं। हरियाली तीज पर मेहंदी लगाने, चूडियां पहनने, झूला झूलने तथा लोक गीत गाने का विशेष महत्व है। अविवाहित कन्याएं योग्य वर पाने तथा सुहागिन महिलाएं अपने सुखी दांपत्य के लिए श्रावणी तीज का व्रत करती हैं।
इस बार श्रावणी तीज अथवा हरियाली तीज रविवार 27 जुलाई 2025 को मनाई जाएगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि का प्रारम्भ शनिवार 26 जुलाई को रात 10:41 (PM) बजे होगा और तृतीया तिथि का समापन रविवार 27 जुलाई 2025 को रात 10:41 (PM) बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार हरियाली तीज रविवार 27 जुलाई 2025 को मनाई जाएगी।











