लाहौर। पाकिस्तान का लाहौर एक बार फिर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पर पहुंच गया है। पिछले एक हफ्ते में यह दूसरी बार है जब लाहौर ने प्रदूषण के मामले में सभी शहरों को पीछे छोड़ दिया है। शहर की हवा में ज़हरीले कणों की मात्रा इतनी अधिक है कि स्मॉग खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा से कई गुना ज़्यादा है।
स्विस पर्यावरण मॉनिटरिंग कंपनी IQAir के अनुसार, सोमवार को लाहौर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 312 दर्ज किया गया, जिसे “Hazardous” यानी बेहद खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। हवा में मौजूद PM2.5 (अति सूक्ष्म प्रदूषक कण) का स्तर 190.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो WHO की वार्षिक गाइडलाइन से 25 गुना अधिक है। रात 10 बजे तक लाहौर ने दिल्ली (AQI 220) और कोलकाता (AQI 170) जैसे शहरों को भी पीछे छोड़ दिया। इससे पहले, 22 से 25 अक्टूबर के बीच भी लाहौर का AQI 412 तक पहुंच गया था, जब यह दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया था।
लाहौर की हवा में मौजूद ज़हरीले कण बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्थमा या दिल की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए बेहद हानिकारक हैं। WHO के अनुसार, स्वच्छ हवा इंसान के जीवन के लिए आवश्यक है। उसकी 2021 की गाइडलाइन के मुताबिक, PM2.5 का वार्षिक स्तर 5 माइक्रोग्राम और दैनिक स्तर 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए।
स्मॉग की बढ़ती चुनौती और सरकारी कदम
लाहौर में हर साल अक्टूबर से फरवरी के बीच स्मॉग की समस्या बढ़ जाती है, जिसका कारण है — वाहनों का धुआं, कारखानों से निकलने वाले प्रदूषक, ईंट-भट्ठों का धुआं और खेतों में पराली जलाना। पंजाब प्रांत की सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए “स्मॉग इमरजेंसी प्लान” लागू किया है। पर्यावरण मंत्री मरियम औरंगज़ेब ने बताया कि पराली जलाने पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है, जबकि ईंट-भट्ठों और कारखानों पर सख्त कार्रवाई जारी है। शहरी इलाकों में आर्टिफिशियल बारिश (पानी का छिड़काव) और स्मॉग गन से सफाई अभियान भी चलाया जा रहा है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सुबह-शाम घर से निकलने से बचें और आवश्यक हो तो मास्क का इस्तेमाल करें।











