राम की प्राण-प्रतिष्ठा: अंजना वर्मा

अंजना वर्मा
कृष्णा टोला, ब्रह्मपुरा
मुज़फ्फरपुर-842003
बिहार

जय-तिलक काल का यह समय हो गया
राम आए जगत राममय हो गया

अब तलक वेदना से भरी रात थी
सत्य वनवास में था झुकी आँख थी
पाप-अन्याय रो-रोके सहते रहे
झूठ के ध्वज गगन में फहरते रहे
सत्य की जीत से जन अभय हो गया
राम आए जगत राममय हो गया

युग नया अब लिखा जाएगा देश में
ना रहेगा असुर साधु के वेश में
बेबसी में न जीता रहेगा कोई
निर्बलों को सता ना सकेगा कोई
रामयुग का धरा पर उदय हो गया
राम आए जगत राममय हो गया

प्रेम करना सभी से यही राम है
राम जैसा सुखद ना कोई नाम है
त्याग का जो शिखर हर्ष-दुख से परे
धर्म की भूमि पर जो अटल हैं खड़े
जो महाबल भी होकर सदय हो गया
राम आए जगत राममय हो गया