कतरा आलोक का: उषा किरण

उषा किरण

एक रीतेपन का अहसास
मेरे मन में एक अजाने दर्द की सृष्टि करता है
और मैं जान भी नहीं पाती कि
ऐसा क्यों होता है, क्या होता है
मन बार- बार छटपटाता है
जैसे मन के अंदर कोई
कोई परकटा पंछी
अपनी बैंजनी उड़ाने भरने को आकुल हों
तभी नियति के सुदूर कोने से
एक बबंडर – सा उठता है और
एक अजीब- सी पीड़ा
मेरे मन में समा जाती है
परंतु मन के इस अंधड़ में
कहीं कोई आलोक का कतरा
रह जाता है, जो हमेशा
मुझे दीप – स्तंभ की तरह
फिर आगे बढ़ा देता है—-
आलोक प्रेम का— याद का।

उषा किरण
शिक्षा : एम ए ( हिंदी साहित्य)
पटना ( बिहार)
एकल काव्य संग्रह- जीवन की लय ( Rhythm of Life) , जो रह गयी थी अनकही।
साझा काव्य संग्रह- काव्य कुसुम , काव्य कलश, रंगोत्सव, नवसृजन,स्वर प्रवाह, सृजन के स्वर।
साझा लघुकथा संग्रह- इजोत
साझा संग्रह अंग्रेजी में अनुवाद- Four Stars, Daughters are the Splendor of Home, Father is the Foremost Pioneer