ही लव्स मी: सपना भट्ट

मन के कबाड़खाने में बहुत सी स्मृतियाँ थीं
स्मृतियों में दुःख थे
दुःख प्रेम के पर्याय थे
और प्रेम रुंधे कण्ठ से उपजी एक ध्वनि भर था
कातर और आद्र…

मेरी प्राथमिकताओं में तुम नहीं
तुम्हारा प्रेम था
तुम्हारी विराटता ने मेरी
सामर्थ्य को आइना क्या दिखाया
तुम्हारे अंतरिक्ष की यात्रा में
मेरे पंख हार गए देखो…

ख़ैर
तमाम शुबहों को ख़ारिज करते हुए
एक इत्मीनान ज़हन में सर उठाना चाहता है
और पूछना चाहता है सिरफिरा सा एक विह्वल प्रश्न

मैं अब एक फूल की पंखुड़ियों को
तोड़ती हुई बुदबुदाती हूँ
ही लव्स मी, ही लव्स मी नॉट
और उदास हो जाती हूँ…

सपना भट्ट