इस समय बिजली कटौती जैसी गंभीर स्थिति से हलाकान होकर मध्य प्रदेश की आम जनता बिजली व्यवस्था के सुचारू होने की राह देख रही है, परंतु ऊर्जा विभाग की बिजली कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन अपने प्रयोगवादी सिद्धांत को सर्वोपरि रखते हुए सभी विद्युत संचालन कानूनों एवं विद्युत सुरक्षा नियमों को धता बताकर बिजली उपभोक्ताओं को बिजली कटौती जैसी गंभीर समस्या से निजात दिलाने का दंभ भर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों के सुझावों एवं अति आवश्यक मांगों को दरकिनार कर प्रदेश के आम नागरिकों एवं प्रदेश सरकार की आंख में धूल झोंकने का काम करने सहित पूरे प्रदेश को अंधेरे की ओर धकेलने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं, फलस्वरूप अपनी नाकामी को छुपाने के लिए गैर जिम्मेदार कर्मचारियों एवं फर्जी आंकड़ों का सहारा ले रहे हैं।
मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष प्रदीप कुमार द्विवेदी ने इस मामले पर ऊर्जा विभाग सहित कंपनी प्रबंधनों की पोल खोलते हुए विद्युत वितरण क्षेत्र में उत्पन्न अघोषित व्यवधान पर अपने विचार रखे और वितरण कंपनी प्रबंधनों को इस अघोषित विद्युत कटौती का जिम्मेदार बताते हुए अघोषित विद्युत व्यवधान को रोकने के लिए विभागीय आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एवं ख़बरों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सभी आकड़ों को फर्जी करार दिया है।
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प्रदीप कुमार द्विवेदी ने न्यूज पोर्टल लोकराग से चर्चा के दौरान पश्चिम क्षेत्र कंपनी के कुछ आंकड़ों पर प्रकाश डाला है जो आश्चर्यजनक है, लोकराग से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि विगत दिनों पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी प्रबंधन ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एवं मीडिया खबरों के माध्यम से जमीनी स्तर के जोनल कार्यालयों में मनमाने ढंग से संलग्न किए गए गैर कानूनी एवं अनाधिकृत कर्मचारियों की भीड़ इकट्ठी कर वितरण क्षेत्र में व्याप्त अब अघोषित विद्युत कटौती पर तथ्यों एवं तर्कों के साथ ऊर्जा विभाग की कुनीतियों को जिम्मेदार बताते हुए सवाल खड़ा किया कि जब पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी प्रबंधन द्वारा ही आरटीआई में दिए अपने ही जवाब में पूरी कंपनी कार्यक्षेत्र में तृतीय श्रेणी “लाइनमैन” पदनाम वाले कर्मचारियों की संख्या 0 तथा सहायक लाइनमैन के ढाई सौ स्वीकृत पदों में 187 पद रिक्त एवं चतुर्थ श्रेणी लाइन परिचारकों की 2968 स्वीकृत पदों पर मात्र 1796 अधिकृत कर्मचारी ही कार्यरत बता रही है तो, भीषण गर्मी में बिजली व्यवस्था ध्वस्त होने पर लाइनों पर मेंटेनेंस कार्य करने हेतु मात्र इंदौर शहर में 1600 कर्मचारियों को कहां से लाया गया और बिजली कंपनी बेहतर बिजली संचालन हेतु किस प्रकार के अतिरिक्त नए कर्मचारी एवं संसाधन उपलब्ध करवाने की बात कर रही है।
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यह एक गंभीर प्रश्न है कि क्या प्रदेश की बिजली व्यवस्था अनाधिकृत एवं अल्प वेतन भोगी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का अनैतिक एवं नियम विरुद्ध शोषण एवं प्राणों की बलि लेकर चलाई जाएगी या उनका भी कोई मानवाधिकार है, जबकि बिजली क्षेत्र के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की वर्षों से निरंतर प्रतिवर्ष सर्वाधिक सैकड़ो मौतें हो रही हैं फिर भी किसके इशारे पर ऊर्जा विभाग द्वारा निरपराध नौजवानों को विद्युत अधिनियम 1956 के उप नियम 45 एवं नियम 35 अधिनियम दो तथा नियम 64 के उपनियमों के विरुद्ध बिजली जैसे खतरनाक क्षेत्र में आहुति देने हेतु मजबूर किया जा रहा है?









